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इस्पात निर्यात रहेगा ज्यादा फायदेमंद

अदिति दिवेकर | मुंबई Mar 21, 2018 10:09 PM IST

मजबूत निर्यात

वैश्विक बाजारों में इस्पात के दाम ऊंचे बने हुए हैं और चीन विदेशी बाजारों में बिक्री कर रहा है कम
देश का निर्यात अप्रैल-जनवरी के बीच 40.2 फीसदी बढ़ा
वित्त वर्ष 2018 में 10 करोड़ टन से अधिक इस्पात उत्पादन का अनुमान
औद्योगिक और विनिर्माण वृद्धि में सुधार से इस्पात की घरेलू मांग में भी बढ़ोतरी के आसार

देश का इस्पात निर्यात आने वाले समय में मजबूत रहने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि इस्पात की वैश्विक कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और चीन का निर्यात घट रहा है। दरअसल चीन वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए करीब 3 करोड़ टन की अतिरिक्त घरेलू उत्पादन क्षमता में कटौती पर ध्यान दे रहा है।

इक्रा लिमिटेड में वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत राय ने कहा, 'इस्पात की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची हैं, इसलिए भारतीय इस्पात उत्पादकों के लिए निर्यात घरेलू बिक्री की तुलना में ज्यादा फायदेमंद रहने की संभावना है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में आपूर्ति के लिए जगह है क्योंकि चीन निर्यात कम कर रहा है और उसके घरेलू बाजार में फिर से अच्छी मांग आने लगी है।' 

भारत का इस्पात निर्यात अप्रैल 2017 से जनवरी, 2018 के बीच इससे बीते वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 40.2 फीसदी बढ़ा है, जबकि इस्पात की घरेलू मांग सालाना आधार पर केवल 5.4 फीसदी बढ़ी है। समीक्षाधीन अवधि में इस्पात का उत्पादन 8.85 करोड़ टन रहा।

एक स्थानीय ब्रोकरेज के विश्लेषक ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए बताया, 'इस्पात के निर्यात में बढ़ोतरी से ही इस साल घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी को मदद मिल रही है। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018 में 10 करोड़ टन से अधिक इस्पात का उत्पादन होगा, जो मुख्य रूप से निर्यात मांग पूरी करने के लिए होगा। दूसरी ओर घरेलू खपत 10 करोड़ टन के आंकड़े से काफी कम रहेगी।'

उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि इस समय भारतीय इस्पात की कीमतें 650 डॉलर प्रति टन के आसपास बनी हुई हैं, जबकि अमेरिका में कीमतें करीब 900 डॉलर प्रति टन हैं। यूरोपीय इस्पात के दाम करीब 750 डॉलर प्रति टन बने हुए हैं और दक्षिण कोरिया एवं अन्य एशियाई देशों में भी कीमतें लगभग इतनी ही हैं। इससे भारतीय इस्पात कंपनियों के लिए वैश्विक कीमतों के माहौल का संकेत मिलता है, जो घरेलू बाजार में बिक्री की तुलना में काफी अधिक लुभावना है। इस्पात निर्यात बाजार आगामी महीनों में काफी अच्छा रहने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। उद्योग के अधिकारियों का मानना है कि भारत में भी उत्साहनजक आर्थिक संकेतकों से आगे घरेलू मांग बढ़ सकती है। 

सरकार के आंकड़े दर्शाते हैं कि देश की औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि जनवरी में 7.5 फीसदी रही, जो उम्मीद से अधिक है। इससे पिछले महीने वृद्धि 7.1 फीसदी रही थी। समीक्षाधीन अवधि में विनिर्माण वृद्धि दर 8.7 फीसदी रही। जनवरी लगातार तीसरा ऐसा महीना था, जिसमें देश में औद्योगिक वृद्धि 7 फीसदी से अधिक रही। देश में पूंजीगत वस्तु खंड की वृद्धि जनवरी में 14. फीसदी रही, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में 0.6 फीसदी गिरावट आई थी।

जेएसडब्ल्यू स्टील के निदेशक (वाणिज्य) जयंत आचार्य ने कहा, 'हम फिर से घरेलू बाजार पर ध्यान देंगे क्योंकि वृद्धि बढ़ रही है। हम अपने उत्पादों में घरेलू बाजार को मद्देनजर रखते हुए बदलाव करेंगे, जिससे कुल राजस्व में निर्यात का अनुपात कम होगा।' उन्होंने कहा, 'निर्यात का कुछ हिस्सा इसी तिमाही में कम हो जाएगा और धीरे-धीरे निर्यात का अनुपात 20 फीसदी से नीचे आ जाएगा।'

अभी सज्जन जिंदल की अगुआई वाली जेएसडब्ल्यू के कुल राजस्व में निर्यात का हिस्सा करीब 23 से 25 फीसदी है। आचार्य ने कहा, 'घरेलू बाजार में वाहनों की मांग बढ़ी है, जिससे हम हॉट एवं कोल्ड रॉल्ड और गैल्वेनाइज्ड इस्पात के निर्यात के बजाय घरेलू बाजार को आपूर्ति करने को प्रोत्साहित होंगे।'

औद्योगिक और विनिर्माण वृद्धि में सुधार से इस्पात की घरेलू मांग में बढ़ोतरी के आसार नजर आ रहे हैं, लेकिन पूंजीगत व्यय वृद्धि चक्र के जल्द ही शुरू होने के लेकर जानकारों के विचार मिलेजुले हैं। सरकार ने 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसका मतलब है कि निकट भविष्य में नई परियोजनाएं आएंगी।  एस्सार स्टील के निदेशक (वाणिज्य) एच शिवरामकृष्णन ने कहा, 'आज हमारे यहां 9 से 9.5 करोड़ टन की खपत है और अगर हम 7 से 8 फीसदी जीडीपी वृद्धि मानकर चलते हैं तो खपत बढ़कर 12 से 13 करोड़ टन हो जाएगी। इतनी मांग पूरी करने के लिए हमारे पास पर्याप्त क्षमता नहीं है। चिंता यह है कि इस स्थिति से हम अगले पांच साल में शुद्ध आयातक न बन जाएं।'
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