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लंबी अवधि के कर्ज देने वाले की तलाश

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 23, 2018 08:39 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स की संलिप्तता वाले 115 अरब रुपये के घोटाले के बाद हीरों के खुदरा कारोबारी कर्ज के लिए ज्यादा नकदी वाले संगठित कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं।  ज्यादातर बैंकों ने हीरा कारोबारियों को ऋण में अपना हाथ सख्त कर लिया है। अन्य बैंक भी ऐसा कर रहे हैं। इस वजह से हीरों के बहुत से लघु एवं मझोले डीलर ऋण के लिए उद्योग में ही बड़े कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं।  पिछले सप्ताह के प्रारंभ में देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने रत्न एवं आभूषण उद्योग के कर्जदारों के लिए गिरवी मांग सख्त करने की घोषणा की थी। हाल में बहुत से रत्न एवं आभूषण विनिर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं को भारत अंतरराष्ट्रीय सराफा सम्मेलन में यह पता चला कि बैंकों ने उन्हें ऋण देना बंद कर दिया है क्योंकि वे अब, विशेष रूप से पीएनबी-नीरव मोदी घोटाले के बाद पूरे क्षेत्र को लेकर संदेह का नजरिया रखते हैं।  
 
इस क्षेत्र के संगठित उद्यमी लघु एवं मझोले कारोबारियों को ऋण दे रहे हैं, इसलिए उद्योग निजी ऋण व्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है। हीरों के खुदरा कारोबार में इस बदलाव से इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) जैसे ऑनलाइन हीरा कारोबारी प्लेटफॉर्मों समेत संगठित उद्यमियों को फायदा होने की संभावना है।  सूरत डायमंड एसोसिएशन के सचिव दिनेश नवादिया ने कहा, 'संगठित उद्यमी विश्वसनीय हीरे मुहैया कराते हैं, जो जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका (जीआईए) और इंटरनैशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) जैसे मान्यता प्राप्त प्रमाणन एजेंसियों से प्रमाणित होते हैं। ये हीरे विश्वसनीय होते हैं। इसके अलावा बैंकों से ऋण न मिलने की स्थिति में संगठित उद्यमी लघु एïवं मझोले कारोबारियों को ऋण मुहैया कराते हैं। इसलिए यह कारोबार असंगठित से संगठित हो रहा है।'
 
कहा जा रहा है कि कथित पीएनबी घोटाले में लिप्त दोनों आभूषण विनिर्माता- नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स अमेरिकी हीरों को प्राकृतिक हीरों के रूप में काफी ऊंची कीमतों पर बेच रहे थे।  यह घोटाला सामने आने के बाद पिछले पांच सप्ताह में संगठित और विश्वनीय हीरा प्रमाणन एजेंसियों ने अपने यहां प्रमाणन के लिए आने वाले हीरों की मात्रा में तगड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है।  केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव मनोज द्विवेदी ने कहा है कि घोटाले के दोहराव से बचने के लिए रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में मजबूत स्व-नियमन होना चाहिए। 
 
सूत्रों ने कहा कि पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद एसबीआई ने आभूषण विनिर्माताओं के मंजूर सभी ऋणों की समीक्षा की है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि पर्याप्त सुरक्षात्मक कदम उठाए गए हैं या नहीं। बैंक ने अपने अधिकारियों को गिरवी संपत्ति बढ़ाकर ऋण की 40 से 50 फीसदी करने या पर ध्यान देने को कहा है। हांलाकि अन्य का मानना है कि लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) और लेटर्स ऑफ कंफर्ट (एलओसी) पर रोक के बाद बैंकों ने माल की कीमत के 100 से 120 फीसदी कोलेटरल के लिए कहना शुरू कर दिया है। 
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