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पोल्ट्री उत्पादों की कमजोर मांग से कीमतें 21 फीसदी तक घटीं

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 23, 2018 08:40 PM IST

कमजोर मौसमी मांग और गर्मी आने में देरी के चलते फरवरी की शुरुआत से पोल्ट्री उत्पादों की कीमत में 21 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। बर्ड फ्लू के डर से भी उपभोक्ता पोल्ट्री उत्पादों को खरीदने से दूरी बना रहे हैं। पोल्ट्रीबाजारडॉटनेट की ओर से एकत्रित आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में अंडों की कीमतों में 21 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है। कीमत 1 फरवरी को जहां 3.95 रुपये प्रति अंडे थी, वह अब 3.10 रुपये प्रति अंडे हो गई है। मुंबई में कीमतों में 11 फीसदी की कमी आई है। यहां इसी दौरान कीमत 4.15 प्रति अंडे से घटकर 3.70 प्रति अंडे हो गई है। मुंबई में ब्रॉयलर चिकन की कीमत में 18.6 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई है। ब्रॉयलर चिकन की कीमत 1 फरवरी को जहां 70 रुपये प्रति किलो थी, वह अब घटकर 57 रुपये प्रति किलो रह गई है। कोच्चि में ब्रॉयलर चिकन फिलहाल 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि फरवरी के आरंभ में यह 69 रुपये प्रति किलो बिक रहा था।  
 
गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बलराम यादव ने कहा, 'पोल्ट्री कीमतों में यह गिरावट मौसमी है। अभी स्कूल और कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हैं, और इस दौरान पोल्ट्री उत्पादों की खपत में कमी आती है। हमें उम्मीद है कि परीक्षाएं समाप्त होने पर सामान्य खपत फिर से बहाल हो जाएगी।'  पोल्ट्री उत्पादों की खपत में कमी का एक कारण बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) के फैलने का डर भी है। इस उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष दिसंबर में बेंगलूरु में बर्ड फ्लू फैलने की शिकायत आई थी। उसके बाद से महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 11 जिलों में इसके फैलने को लेकर चेतावनी जारी की और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को जांच के लिए नमूने लाने का निर्देश दिया था। संयोग से उनमें से किसी भी नमूने का परिणाम सकारात्मक नहीं पाया गया। हालांकि, एवियन इन्फ्लुएंजा के डर ने सऊदी अरब के अधिकारियों को फिलहाल भारत से पोल्ट्री उत्पादों का आयात रोकने पर मजबूर होना पड़ा। पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश खत्री ने सरकारी नीतियों को प्रभावित करने का दोष गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर लगाया है। उन्होंने कहा, 'ये विदेशों से वित्त पोषित एनजीओ यहां पोल्ट्री उद्योग को विकसित नहीं होने देना चाहते। वे समय समय पर कुछ निश्चित फार्मों पर एवियन इन्फ्लुएंजो फैलने को लेकर डर फैलाते रहते हैं। मेरे विचार से देश में फिलहाल बर्ड फ्लु जैसी कोई स्थिति नहीं है, ऐसे में सऊदी अरब की ओर से पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर तात्कालिक रोक अनुचित है। 
 
वेंकटेश्वरा हैचरीज के महाप्रबंधक के जी आनंद ने कहा, 'फरवरी और मार्च में पोल्ट्री उत्पादों की खपत कम रहती है। अप्रैल में गर्मी बढऩे के साथ ही अप्रैल के दूसरे हफ्ते से इसमें तेजी आने की उम्मीद है।'   पिछले कुछ वर्षों के दौरान, प्रचार में किसानों की ओर से सक्रिय भागीदारी के कारण पोल्ट्री उत्पादों के मांग के रुझान में बदलाव आया है। पहले सर्दियों के मौसम में ही पोल्ट्री उत्पादों की अधिक खपत होती थी, लेकिन विभिन्न प्रचार माध्यमों से यह बताए जाने के बाद कि पोल्ट्री उत्पाद गर्मियों में भी उसी तरह से फायदेमंद हैं, अब स्थिति बदल चुकी है।  
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