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सिकुड़ा वस्त्र निर्यात

विनय उमरजी | अहमदाबाद Mar 25, 2018 09:52 PM IST

फरवरी माह में एक बार फिर भारत का वस्त्र निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 10.25 प्रतिशत कम हो गया। लगातार गिरते निर्यात पर उद्योग के संगठन परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने चिंता व्यक्त की है। एईपीसी द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत में रेडीमेड वस्त्र निर्यात फरवरी माह में मुश्किल से 1.44 अरब डॉलर रहा, जो फरवरी 2017 में लगभग 1.60 अरब डॉलर था। अगर रुपयों में बात करें, तो यह फरवरी 2017 के 107.6774 अरब रुपये से 13.86 प्रतिशत गिरकर फरवरी 2018 में 92.7508 अरब रुपये हो गया। 

 
एईपीसी अध्यक्ष एचकेएल मागू के अनुसार देश में वस्त्र उत्पादन पहले से ही लगातार कम होता जा रहा है और अप्रैल-जनवरी 2017-18 के बीच इसमें 10.4 प्रतिशत की गिरावट आई। उन्होंने कहा, 'अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के बीच वस्त निर्यात में 10.25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारत द्वारा दी जा रही निर्यात सब्सिडी को लेकर अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में शिकायत की है और इससे बनी अनिश्चितता के कारण हम उद्योग के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अक्टूबर 2017 के बाद निर्यात लगातार गिरता जा रहा है।'
 
पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात में तेजी आने से भी देश का निर्यात तीव्रता से गिरा है। जुलाई 2017-फरवरी 2018 के बीच बांग्लादेश के निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 8.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भारत द्वारा चलाए जा रहे निर्यात सब्सिडी कार्यक्रम जैसे मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस), निर्यात उन्मुखी इकाई योजना, निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु योजना आदि को लेकर अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शिकायत दर्ज कराई है।
 
एईपीसी ने इस पर चिंता जताई है। मागू ने कहा कि इसने भारत में मामले को और गरम कर दिया है। एईपीसी अध्यक्ष ने आगे कहा, 'निर्यात सब्सिडी हटाने से केवल बांग्लादेश जैसे देशों को फायदा होगा, जिनका रेडीमेड वस्त्र निर्यात लगातार बढ़ रहा है। यह एक गंभीर समस्या है और हम सरकार से गुजारिश करते हैं कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।' अप्रैल-फरवरी 2017-18 में भारत का रेडीमेड वस्त्र निर्यात 15.22 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 2.19 प्रतिशत कम है।
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