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एमएसपी खरीद की चर्चा से चढ़ा चना

बीएस संवाददाता | नई दिल्ली Mar 26, 2018 10:19 PM IST

नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पर चने का अप्रैल वायदा आज करीब 4 फीसदी बढ़कर 3,727 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। चने की कीमतों में बढ़ोतरी इन खबरों से हुई है कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने घोषित 7 फीसदी निर्यात प्रोत्साहन योजना में चने को शामिल कर लिया है। इसके अलावा आगामी महीनों में चने के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी बढ़ोतरी की जा सकती है।  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में पैदा होने वाले दो प्रमुख दलहनों- चना और मसूर को भावांतर भुगतान योजना से बाहर करने का फैसला किया है, जिससे इसकी कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि इस वजह से कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। 
 
ऐंजल कमोडिटीज के उपाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा, 'ऐसा लगता है कि बाजार केंद्र के निर्यात सहायता योजना में चने को भी शामिल करने के फैसले से उत्साहित है। चने को निर्यात सहायता योजना में शामिल किए जाने को सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन यह बड़ी वजह नहीं है क्योंकि बाजार पर इस फैसले का असर पहले ही पड़ चुका है।' उन्होंने कहा कि बाजार में इस बात को लेकर भी कुछ चर्चाएं चल रही हैं कि केंद्र के एमएसपी आकलन के नए तरीके का चने की कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने भारतीय वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के जरिये चने को राहत दी थी। सात फीसदी की दर से निर्यात मदद की अवधि 3 महीने और बढ़ा दी गई है।
 
निर्यातकों को एमईआईएस के तहत को एक पर्ची मिलती है, जिसका वे इतनी ही मात्रा के आयात में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस प्रोत्साहन के बावजूद चने की कीमतें लगातार केंद्र सरकार के एमएसपी से नीचे बनी हुई हैं। सरकार ने 2018-19 सीजन के लिए चने का एमएसपी 4,400 रुपये प्रइत क्विंटल तय किया है।  गुप्ता ने कहा, 'भारी आवक की वजह से वायदा कीमतों पर बना रहेगा। आवक आने वाले हफ्तों में अपने चरम पर होगी, इसलिए कीमतें 4,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर जाने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।' इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में भी चने की कीमतें केंद्र के एमएसपी से करीब 10 फीसदी नीचे बनी रहेंगी। 
 
चने का उत्पादन 2018-19 में करीब 18.3 फीसदी बढ़कर 111 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें से एक बड़े हिस्से का उत्पादन मध्य प्रदेश में होगा। मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में किसानों ने इस साल अच्छी कीमतों के चलते गेहूं की जगह चने की बुआई की है।  इस बीच एक संबंधित घटनाक्रम में मध्य प्रदेश सरकार ने चने और मसूर को भावांतर भुगतान योजना से बाहर करने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने इस फैसले से कुछ सप्ताह पहले ही योजना में प्याज और लहसुन को शामिल किया था। इस योजना के तहत कृषि जिंस की कीमत एसएसपी से जितनी गिरती है, उस राशि का भुगतान सीधे किसान को किया जाता है। लेकिन इसकी एक निश्चित सीमा है। 
 
हालांकि सरकार इस जिंस की भौतिक खरीद नहीं करती है। हालांकि विशेषज्ञों और बाजार जानकारों ने कहा कि कारोबारियों ने भोले-भाले किसानों के साथ मिलकर अपने लाभ के लिए इस योजना का खूब फायदा उठाया है और कृत्रिम रूप से कीमतें कम कर दीं।  हालांकि सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार ने योजना के एक हिस्से को बंद करने और चने एवं मसूर की भौतिक खरीद करने का फैसला किया है। इसकी वजह यह है कि ïभावांतर भुगतान की कुल लागत बढ़ी है, जबकि केंद्र से कोई मदद नहीं मिल रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले सप्ताह दिल्ली में थे, जहां उन्होंने राज्य के कृषि क्षेत्र से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की। 
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