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कपास निगम की फाइबर खरीद में उछाल

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 26, 2018 10:20 PM IST

सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय कपास निगम ने इस साल फाइबर (रेशे) खरीद में आठ गुना वृद्धि दर्ज की है। इस पूरे सीजन के दौरान कपास के दामों में काफी अस्थिरता रहने की वजह से ऐसा हुआ है। दामों में तीव्र वृद्धि के कारण कपास निगम ने पिछले साल सिर्फ वाणिज्यिक परिचालन ही किया था। इसके तहत निगम ने कुल 1,50,000 गांठों (प्रत्येक गांठ का वजन 170 किलोग्राम) की खरीद की थी। हालांकि, तुलनात्मक रूप से निगम ने इस साल वाणिज्यिक परिचालन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत प्राकृतिक फाइबर की कुल 12,00,000 गांठों की खरीद की है। 
 
इस साल खरीदी गई कुल मात्रा में से कपास की करीब 4,00,000 गांठों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य परिचालन के अंतर्गत की गई थी, जबकि शेष 8,00,000 गांठों की खरीद वाणिज्यिक परिचालन के लिए की गई। भारतीय कपास निगम के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि इस साल एमएसपी परिचालन केवल सीमित अवधि के लिए ही जारी रहा। कपास कटाई का सीजन एमएसपी के दामों से ऊपर शुरू होता है। नवंबर-दिसंबर के सीजन में ऊंची आवक के सीजन के दौरान ये दाम तेजी से गिरते हैं। जब दाम एमएसपी के स्तर से नीचे गिरे, तो हमने बाजार में प्रवेश किया और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करीब 4,00,000 गांठों की खरीद की। बाद में कपास के दाम सुधरकर एमएसपी के स्तर से ऊपर आ गए जिससे हम पर अपना परिचालन रोकने का दबाव बना।
 
जनवरी 2018 से कपास के दामों में सुधार शुरू हो गया और ये एमएसपी से ऊपर पहुंच गए। कपास के दामों में स्थिरता रखने और अपना वाणिज्यिक परिचालन करने के निर्देश को ध्यान में रखते हुए निगम ने बाजार की मांग के अनुसार ऊंचे दामों की पेशकश शुरू कर दी। निजी भागीदारों ने भी इस कदम का अनुसरण किया। एक अधिकारी ने कहा कि अगर कपास की कीमतें एमएसपी के स्तर से ऊपर जाती हैं, तो हम चुप नहीं बैठ सकते। साथ ही, जब तक हमारा परिचालन संभव रहता है, तब तक हमें बाजार में चल रही कीमतों पर अपना वाणिज्यिक परिचालन करने का निर्देश दिया गया है। पिछले साल हमने बहुत कम मात्रा में खरीद की थी, क्योंकि हमें लगा था कि वाणिज्यिक परिचालन कठिन हो सकता है।
 
इस बीच, निजी कपास खरीदारों ने भी कपास निगम द्वारा पेश किए जा रहे दामों से बराबरी करना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से  जनवरी से इस जिंस के दाम ऊंचे चल रहे हैं। कपास निगम बाजार चालित दामों पर कपड़ा मिलों के लिए प्राकृतिक फाइबर की नीलामी करता है। लेकिन अगर इसे लगता है कि कपास के दामों में मुश्किल बनी रहेगी, तो ऐसे में आमतौर पर यह बाजार में प्रवेश करने से परहेज करता है।  हालांकि, निगम अभी तक इस सीजन में 10 लाख से अधिक गांठों की खरीद कर चुका है, लेकिन यह बाकी सीजन में 2,00,000 गांठों की और खरीद करने की योजना बना रहा है, जो तकरीबन समाप्ति के कगार पर पहुंच चुका है।
कीवर्ड cotton, joot,

  
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