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कई क्षेत्रों पर भारी पड़ेगी महंगी गैस

शाइन जैकब | नई दिल्ली Mar 29, 2018 10:13 PM IST

वर्ष 2018-19 के पहले छह महीनों के लिए घरेलू प्राकृतिक गैस के दामों में 1 अप्रैल से किया गया छह प्रतिशत का इजाफा तेल और गैस उत्पादकों को कुछ राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन इस संबंध में रिपोर्टों में कहा गया है कि अपस्ट्रीम (अन्वेषण और उत्पादन) उत्पादकों के अधिकांश क्षेत्र के लिए गैस उत्पादन या तो लाभ-हानि रहित रहेगा या फिर उसमें हानि का रुख रहेगा। 2019 की पहली छमाही के लिए घरेलू गैस के दाम 3.06 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) अधिसूचित किए गए हैं, जबकि 2017-18 की दूसरी छमाही के लिए ये दाम 2.89 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू थे। इससे यूरिया और पेट्रोकेमिकल्स की निर्माण  लागत में भी वृद्धि होगी, जहां प्राकृतिक गैस का उपयोग ईंधन के कच्चे माल के तौर पर किया जाता है। रिपोर्ट बताती है कि इससे कम्प्रेस्ड प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जबकि दूसरी ओर, इससे बिजली क्षेत्र और स्पंज आयरन उद्योग का मार्जिन प्रभावित होगा। 
 
केयर रेटिंग्स के अनुसार, इससे ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी अपस्ट्रीम तेल और गैस अन्वेषण कंपनियों को फायदा होगा, क्योंकि गैस की कीमतों में इजाफे से इनकी आमदनी में इजाफा होगा। केयर रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि गैस की कीमतों में वृद्धि कंपनियों को अधिक अन्वेषण गतिविधियां करने को भी प्रोत्साहित करेंगी, क्योंकि इससे प्राकृतिक गैस खंड की आमदनी में सुधार होगा। घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन बढऩे की वजह से 2022 तक तेल और गैस के आयात में 10 प्रतिशत तक की कमी के देश के लक्ष्य को प्राप्त करने में इससे मदद मिलेगी। इसके अलावा, गहरे पानी, अत्यंत गहरे पानी, उच्च तापमान और उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमत पर भी अधिकतम सीमा वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही की अवधि के लिए 6.78 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की दर से घोषित की गई है।
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