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शेल गैस की पहली खेप पहुंची

शाइन जैकब | नई दिल्ली Mar 30, 2018 09:47 PM IST

अमेरिका से द्रवित प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की पहली खेप आज महाराष्ट्र के दाभोल टर्मिनल पर पहुंच गई। यह खेप मैरीलैंड में डोमिनियन एनर्जी कोव प्वाइंट प्रोजेक्ट और लुइजिएना में चेंनियर एनर्जी इंक के साथ अगले 20 वर्ष के लिए हुए गेल के 32 लाख डॉलर के सौदे का हिस्सा है। इससे आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर एलएनजी और कच्चे तेल के आयात के कारण भारत-अमेरिका व्यापार तेजी से बढ़ेगा। दोनों देशों के बीच वस्तु एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार सालाना 11.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जो वर्ष 2000 के 20 अरब डॉलर के मुकाबले 2017 में बढ़कर 126.1 अरब डॉलर हो गया। 2018-19 के लिए अकेले गेल ही लगभग 2 अरब डॉलर कीमत की एलएनजी खरीदेगी। 
 
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अमेरिकी दूतावास में वाणिज्यिक मामलों के सलाहकार पैट्रिक सेंटिलो और गेल अध्यक्ष बी.सी. त्रिपाठी की उपस्थिति में गेल एमवी मैरीडियन स्पिरिट जहाज 25 दिन की यात्रा के बाद भारत पहुंचा। प्रधान ने कहा कि एलएनजी की पहली खेप भारत पहुंचना एक मील का पत्थर है और इसने एहसास दिलाया कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस आयात के बहुत से अवसर मौजूद हैं। उन्होंने आगे कहा कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनने के लिए घरेलू उत्पादन के साथ ही आयात भी बढ़ाना होगा। प्रधान ने बताया कि पाइपलाइन, एलएनजी आयात टर्मिनल और शहरी गैस वितरण प्रणाली समेत प्राकृतिक गैस के लिए आधारभूत ढांचे में पर्याप्त निवेश करना सरकार की प्राथमिकता है।
 
अमेरिकी एलएनजी के लिए अनुबंध करने में गेल कई कंपनियों से आगे रहा और उसने 58 लाख टन गैस के लिए साझेदारी की। गेल को एलएनजी आपूर्ति के लिए सेविन पास और कोव प्वाइंट एलएनजी टर्मिनल से सालाना 90 जहाज मिलेंगे। गेल ने दिसंबर 2011 में चेनियर एनर्जी से बिक्री एवं खरीद अनुबंध (एसएपी) पर हस्ताक्षर किए थे। अनुबंध के अनुसार कंपनी गेल को सालाना 3.5 टन एलएनजी बेचेगी। वर्तमान में चेनियर एनर्जी इंक लुइजिएना में सेविन पास एलएनजी सुविधा का निर्माण एवं संचालन कर रही है और कॉपर्स क्रिस्टी, टैक्सस के निकट एक दूसरी इकाई का निर्माण कर रही है। इस एलएनजी खेप के आने से गेल की सहायक इकाई कोंकण एलएनजी प्राइवेट लिमिटेड के निर्माण में सहायता मिलेगी। कोंकण एलएनजी हाल ही में आपजीपीपीएल से अलग हुई है।  एलएनजी आयात का 70 प्रतिशत एशियाई बाजार वहन करते हैं और भारत का आयात भी तेजी से बढ़ रहा है। 1975 में अमेरिका द्वारा निर्यात पर रोक लगाने के बाद कच्चे तेल की पहली अमेरिकी खेप अक्टूबर 2017 में भारत पहुंची थी। 
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