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सोने का आयात बढ़ते रहने का अनुमान

राजेश भयानी | मुंबई Apr 02, 2018 09:45 PM IST

आगे तगड़ी मांग के आसार

सोने के आयात का बिल 13 फीसदी बढ़कर 34 अरब डॉलर रहने का अनुमान 

सोने के आयात का बिल वित्त वर्ष 2017-18 में पिछले साल के मुकाबले 13 फीसदी बढ़कर 34 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2015 के बाद सबसे अधिक आयात बिल होगा। वित्त वर्ष 2015 के बाद आयात बिल घटा था, लेकिन मांग बढ़ने से वित्त वर्ष 2018 में फिर से बढ़ा है। आगे मांग तगड़ी रहने के आसार हैं, इसलिए वित्त वर्ष 2019 में आयात 10 फीसदी और बढ़ने का अनुमान है।  पिछले वित्त वर्ष में फरवरी के अंत तक आयात बिल 31.06 अरब डॉलर था और मार्च में करीब 2.8 से 3 अरब डॉलर के आयात का अनुमान है, जिससे कुल आयात बिल 34 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। यह वित्त वर्ष 2015 के बाद सबसे अधिक होगा।

नोमुरा की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा, 'पिछले साल सोने की मांग अधिक इसलिए रही क्योंकि नोटबंदी के बाद निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित किया। नोटबंदी के समय सोने में ज्यादा निवेश हुआ था।' उन्होंने कहा कि सोने के आयात बिल का वर्तमान स्तर अभी चालू खाते के लिए बड़ी चिंता नहीं है। तेल एक चिंता है। वर्मा ने कहा, 'पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करने की प्रवृत्ति वित्त वर्ष 2019 में भी बनी रह सकती है। निवेशक सोने में ज्यादा निवेश को तरजीह दे रहे हैं, जिससे निवेश के लिए सोने के आयात में इजाफा हो सकता है। हालांकि खाद्यान्न की कीमतें नहीं बढऩे और ग्रामीण मजदूरी भी औसत स्तर पर बने रहने से ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है। इसलिए यह देखना होगा कि सोने की कीमतों में कैसा रुझान रहता है।'

भारतीय निवेशक कीमतों के हिसाब से फैसला करते हैं। अगर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी की धारणा बन जाती है तो निवेश मांग में इजाफा होता है। सोनल ने कहा, 'उस स्थिति में सोना वित्त वर्ष 2019 में चालू खाते के लिए चिंता का सबब बन सकता है।' इसलिए क्या सोने की कीमतें बढ़ेंगी? अमेरिका स्थित वित्तीय बाजार विशेषज्ञ और अरोड़ा रिपोर्ट के लेखक निगम अरोड़ा को वित्त वर्ष 2019 में सोने के बेहतर प्रतिफल देने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर सोने ने वित्त वर्ष 2018 में 6.1 फीसदी प्रतिफल दिया है, जो लगातार तीसरे साल धनात्मक प्रतिफल है। वहीं भारत में सोने ने 7.18 फीसदी प्रतिफल दिया है।

अरोड़ा ने कहा, 'इस समय सोने को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारण डॉलर की कमजोरी और दुनियाभर के शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव हैं। पिछले कुछ समय से डॉलर कमजोर है, जिससे सोना मजबूत हुआ है। दुनियाभर के शेयर बाजार अस्थिर हैं। जब शेयर बाजार गिरते हैं तो सुरक्षित निवेश के रूप में कुछ पैसा सोने में आता है। इन दोनों वजहों से सोने को मदद मिल रही है। अगर वे आगे भी मददगार बने रहे तो सोना करीब 1,360 डॉलर के तकनीकी प्रतिरोध को तोड़ने की कोशिश कर सकता है। अगर यह प्रतिरोध टूटा तो अगला लक्ष्य 1,400 डॉलर होगा।'

भारत में भी दिवालिया विधेयक, बढ़ते फंसे हुए कर्ज, राजनीतिक अनिश्चितता जैसी कई अनिश्चितताओं से सोने की मांग बढ़ेगी। इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019 में सोने की कीमतें और आयात 10 फीसदी से अधिक बढ़ेंगे। समष्टि अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, वैश्विक व्यापार युद्ध, शेयर बाजार काफी ऊंचे स्तर पर होने और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की ऊंची लागत के कारण सोने की मांग बढ़ेगी।'

सोने की मांग और आयात के लिहाज से पिछले तीन महीने बहुत अच्छे नहीं रहे। इसकी वजह शुल्क में कटौती एवं बजट, बढ़ती कीमतें आदि रहे। हालांकि अप्रैल अच्छा महीना रह सकता है। पोपली समूह के निदेशक राजीव पोपली ने कहा, 'हाल के हफ्तों में मांग काफी स्थिर बनी हुई है। हालांकि अक्षय तृतीया पर अच्छी मांग आने की उम्मीद है, जिसमें तीन हफ्ते बाकी हैं। आयात में बढ़ोतरी होगी, जो वित्त वर्ष के अंत में कम आयात की भरपाई कर देगा।'

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