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मॉनसून में झमाझम बारिश के आसार

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Apr 04, 2018 09:42 PM IST

संकट से जूझ रहे कृषि क्षेत्र के लिए एक राहत देने वाली खबर आई है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी संस्था स्काईमेट ने इस साल मॉनसून सामान्य रहने की बात कही है। स्काईमेट ने कहा कि 2018 में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून सामान्य रह सकता है, जिसमें शत-प्रतिशत दीर्घावधि औसत (एलपीए) के साथ 5 प्रतिशत की कमी या बढ़ोतरी (मॉडल एरर) की गुंजाइश हो सकती है। यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति की समीक्षा से एक दिन पहले आया है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक बुधवार को मुंबई में शुरू हो गई है और माना जा रहा है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। मॉनसून सामान्य रहने के अनुमान से कृषि क्षेत्र को दम मिलेगा, वहीं खाद्य महंगाई निचले स्तर पर रहने से ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ जाएगी। 
 
जून से सितंबर महीने की बारिश का दीर्घावधि औसत करीब 887 मिलीमीटर है। एजेंसी का कहना है कि इस साल देश में बारिश लंबी अवधि की औसत का 100 फ ीसदी हो सकता है, जिसमें 5 प्रतिशत कम या ज्यादा होने की संभावना है। सामान्य रहने की 80 प्रतिशत संभावना है जो एलपीए के 96-104 प्रतिशत के बीच रह सकता है।  पिछले तीन सीजन में वास्तविक बारिश स्काईमेट के 2015 और 2016 के पूर्वानुमान के मुकाबले कम हुई। हालांकि  बाद में इन इस अनुमान में संशोधन भी हो सकता है। स्काईमेट ने कहा है कि जून में मॉनसून की बारिश दीर्घावधि औसत की 111 प्रतिशत होगी और इसमें बारिश के सामान्य रहने की 90 प्रतिशत संभावना होगी। जून में करीब 164 मिलीमीटर बारिश होती है। जुलाई में बारिश एलपीए की 97 प्रतिशत तक हो सकती है और इसके 70 प्रतिशत सामान्य रहने की उम्मीद है। 
 
जुलाई में देश में करीब 289 मिलीमीटर बारिश होती है जो जून से शुरू होने वाले चार महीने के मॉनसून के सीजन में सबसे ज्यादा है। जुलाई इस वजह से भी अहम है क्योंकि इसी दौरान ज्यादातर खरीफ फसलों की बुआई होती है। स्काईमेट का कहना है कि अगस्त में देश को 96 प्रतिशत एलपीए के बराबर बारिश होने की उम्मीद है और इसके सामान्य होने की 65 प्रतिशत संभावना है। 
 
देश में अगस्त महीने में 262 मिलीमीटर की बारिश होती है। सितंबर में एलपीए के 101 फीसदी तक बारिश होने की उम्मीद है और इसके सामान्य रहने की 80 प्रतिशत संभावना है। मॉनसून सीजन के आखिरी महीने में देश में करीब 173 मिलीमीटर की बारिश होती है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून न केवल कृषि की वृद्धि के लिए अहम है बल्कि इससे सामान्य अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है क्योंकि आधे से थोड़े कम खेतों के लिए ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। बेहतर मॉनसून से न केवल खरीफ की फसल अच्छी होने की संभावना बढ़ती है बल्कि इससे जलाशयों को भरने और भूमिगत जल के स्रोत बढऩे में भी मदद मिलती है जो रबी फसलों के लिए भी अहम होता है। देश की सालाना बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के महीने में बढ़ता है। 
 
2017 के दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून सीजन में 95 प्रतिशत के एलपीए के साथ सामान्य से कम बारिश हुई जबकि मौसम विभाग ने 4 फीसदी कमी-बढ़ोतरी के मॉडल एरर के साथ 98 प्रतिशत एलपीए पर बारिश के सामान्य रहने का पूर्वानुमान लगाया था। स्काईमेट ने वर्ष 2017 में मॉनसून के 'सामान्य से कम' रहने का पूर्वानुमान लगाया था। पिछले साल मॉनसून ने जून और जुलाई में संतुलित शुरुआत की थी लेकिन अगस्त महीने में और सितंबर की शुरुआत तक इसमें विस्तारित अंतराल दिखा जिससे कुल संचयी मौसमी बारिश कम हो गई। हालांकि वर्ष 2017 के दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून सीजन में देश के 216 जिले में कम बारिश हुई लेकिन छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों ने 52 जिले की 270 तहसीलों को आधिकारिक रूप से सूखा घोषित करने के लिए कवर किया। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार से भी 110 अरब रुपये से ज्यादा वित्तीय मदद मांगी।
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