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व्यापार युद्ध में सोना-चांदी ही सलामत

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 04, 2018 09:54 PM IST

दुनिया भर के जिंस बाजार में अनिश्चितता का माहौल

दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार जंग छिड़ने जैसे हालात ने इक्विटी और जिंस बाजार दोनों को ही प्रभावित किया
अस्थिरता का माहौल पैदा होने से सोने में निवेश को बल मिला

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के अनौपचारिक ऐलान से बुधवार को भारत समेत दुनिया भर के जिंस बाजारों में काफी अनिश्चितता का माहौल देखा गया। दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के व्यापार युद्ध की जद में आए उत्पादों के भावों में उठापटक दर्ज की गई। चीन ने जैसे ही अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात किए जाने वाले 106 उत्पादों पर 25 फीसदी अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने का प्रस्ताव पेश किया, दुनिया भर के बाजारों में अफरातफरी देखी जाने लगी। इस सूची में शामिल उत्पादों में सोयाबीन, गोमांस, मक्का, गेहूं और कुछ अन्य जिंस भी शामिल हैं। इस साल इन आयातित उत्पादों का अनुमानित मूल्य 50 अरब डॉलर रह सकता है।

इसके पहले अमेरिकी सरकार ने चीन से आयात किए जाने वाले 1600 उत्पादों पर 25 फीसदी अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने की बात कही थी। इन उत्पादों में लोहा एवं इस्पात, एल्यूमीनियम और कुछ अन्य कच्चे माल तथा तैयार उत्पाद शामिल हैं। वर्ष 2018 में चीन से मंगाए जाने वाले इन उत्पादों का मूल्य करीब 50 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार जंग छिड़ने जैसे हालात ने इक्विटी और जिंस बाजार दोनों को ही प्रभावित किया। अस्थिरता का माहौल पैदा होने से सोने में निवेश को बल मिला। एक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ी और लंदन में इसका भाव एक फीसदी बढ़कर 1344.95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए। सोने की चमक का फायदा चांदी को भी मिला और करीब 0.6 फीसदी की बढ़त के साथ 16.49 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

सोने एवं चांदी को छोड़कर बाकी सभी धातुओं, ऊर्जा एवं कृषि उत्पादों की कीमतों में घरेलू और अंतराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर गिरावट का ही रुख देखने को मिला। इंटर कांटिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड के भाल 1.25 फीसदी गिरकर 67.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। तांबा, एल्यूमीनियम और जस्ता जैसे आधार धातुओं के भाव लंदन मेटल एक्सचेंज में 2.5 फीसदी तक की गिरावट पर रहे।

दुनिया में आधार धातुओं के सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन की तरफ से अमेरिकी आयात के प्रति दिखाई गई सख्ती से वैश्विक बाजारों में कारोबारी धारणा पर तगड़ी चोट पहुंच सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के सहायक निदेशक किशोर नार्ने कहते हैं, 'व्यापार युद्ध में सामान्य तौर पर मुद्रास्फीति बढ़ती है और आर्थिक वृद्धि में सुस्ती के हालात बनते हैं। मुद्रास्फीति बढऩा भले ही सोने के लिए अच्छा हो लेकिन मुद्रा और इक्विटी बाजार के कुछ क्षेत्रों के लिए खराब होता है।'

जहां तक सोने के भाव में आई तेजी का सवाल है तो अनिश्चितता के दौर में एक बार फिर उसे सुरक्षित निवेश विकल्प होने का लाभ मिला है। कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशंकर त्यागराजन कहते हैं, 'सुरक्षित निवेश के तौर पर खरीदारी होने से सोने के भाव बढ़े हैं। लेकिन कृषि एवं धातु क्षेत्र के दूसरे उत्पादों ने अमेरिका पर किए गए चीन के पलटवार पर तत्काल प्रतिक्रिया दिखाई है।' कृषि जिंसों में सोयाबीन शुरुआती कारोबार में पांच फीसदी तक गिर गया। हालांकि बाद में सोयाबीन संभला और आधे नुकसान की भरपाई करने में सफल रहा। शिकागो ट्रेड बोर्ड में मक्के एवं गेहूं वायदा के भाव क्रमश: 2.25 और 1.15 फीसदी की गिरावट पर रहे। कपास भी 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 79.41 डॉलर प्रति पौंड दर्ज किया गया।

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'अब यह कई कारकों पर निर्भर करेगा कि चीन के जवाबी कदम से भारत को फायदा होता है या नहीं। संबंधित जिंस की उपलब्धता, उसके उत्पादन की लागत और प्रतिस्पद्र्धी देशों की तरफ से की जाने वाली पेशकश का भी इस मामले में अहम योगदान रहेगा।' चीन सालाना 10 करोड़ टन सोयाबीन का आयात करता है जिसमें अकेले अमेरिका का हिस्सा 34 फीसदी रहा है। लेकिन सोयाबीन के आयात पर शुल्क बढ़ाने की सूरत में दूसरे देशों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं। 
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