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पैकेज से बढ़ेगा चमड़ा निर्यात!

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Apr 05, 2018 11:31 PM IST

चमड़ा और फुटवियर उद्योग को उम्मीद है कि इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा 26 अरब रुपये के विशेष पैकेज की हाल में की गई घोषणा से मौजूदा निर्यात सुस्ती को दूर करने में मदद मिलेगी और साथ ही मूल्य निर्धारण दबाव में कमी आएगी। हालांकि उद्योग का मानना है कि इस पैकेज के लिए दिया गया समय काफी कम है और पिछली योजना से 5 अरब रुपये सरकार द्वारा अभी भी जारी किए जाने हैं। 

इस पैकेज में 2017-18 से 2019-20 के तीन वित्त वर्षों के दौरान 26 अरब रुपये के स्वीकृत खर्च के साथ केंद्र की योजना 'भारतीय फुटवियर, चमड़ा और एक्सेसरीज विकास कार्यक्रम' (आईएफएलएडीपी) का क्रियान्वयन शामिल है। सरकार ने चमड़ा एवं फुटवियर क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दी है और इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सी आर चौधरी ने आज राज्य सभा में घोषणा की। उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह ध्यान दिए जाने की बात है कि उम्मीद की जा रही थी कि पैकेज 40 अरब रुपये से अधिक का होगा, क्योंकि अवधि घटाई गई है और इसलिए खर्च में भी कमी आई है।

 
चमड़ा निर्यात परिषद के क्षेत्रीय चेयरमैन (दक्षिण) इसरार मक्का का कहना है कि इस योजना से दो मुख्य समस्याएं दूर करने में मदद मिलेगी जिनमें कच्चे माल की समस्या भी शामिल है। इस क्षेत्र में एमएसएमई को नए संयंत्र और मशीनरी की लागत के 30 प्रतिशत पर अनुदान/सब्सिडी के जरिये और अन्य इकाइयों को मौजूदा इकाइयों के आधुनिकीकरण/प्रौद्योगिकी उन्नयन और नई इकाइयों की स्थापना के लिए भी संयंत्र एवं मशीनरी की कुल लागत के 20 प्रतिशत पर सहायता दी गई है। अन्य सहायता कॉमन एफ्ल्युंट ट्रीटमेंट अपग्रेडेशन/इंसटॉलेशन के लिए परियोजना लागत के 70 प्रतिशत पर मुहैया कराई गई है। दो योजनाएं कच्चे माल की चुनौतियों को दूर करने में मदद करेंगी। 

दूसरी प्रमुख चुनौती है मानव संसाधन की किल्लत। इस चुनौती को दूर किया जाएगा। योजना में लगभग 2-3 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। फरीदा गु्रप के चेयरैन एम रफीक अहमद का मानना है कि एक बड़ी चुनौती यह है कि लोगों को संयंत्रों में प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। चूंकि कई एमएसएमई पूंजी की किल्लत की वजह से क्षमताओं में निवेश नहीं कर सकते। उन्हें जीएसटी की प्रतिपूर्ति में विलंब का सामना करना पड़ता है और पिछली योजना से लगभग 5 अरब रुपये फंसे हुए हैं।

इन दोनों का मानना है कि इस योजना से 6 अरब डॉलर के चमड़ा एवं फुटवियर निर्यात में लगभग 4-5 प्रतिशत तक का इजाफा होगा, जबकि मौजूदा समय में यह काफी हद तक सपाट या एक प्रतिशत की वृद्घि है। मक्का ने कहा, 'अब हम कीमत के संदर्भ में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे, क्योंकि कच्चे माल और श्रम समेत ज्यादातर लागत पर इस योजना के जरिये ध्यान दिया जाएगा।'
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