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चीनी के दाम 27 महीने में सबसे कम

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 06, 2018 09:57 PM IST

मुंबई की वाशी थोक मंडी में चीनी के दाम 1 फीसदी तक गिरकर आज 27 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गए। चीनी की कीमतों में गिरावट की वजह स्टॉकिस्टों का आपूर्ति बढ़ाना और बड़े खरीदारों की कम मांग आना है।  वाशी मंडी में चीनी की बेंचमार्क एम किस्म के दाम 15 से 30 रुपये गिरकर 3,060 से 3,272 रुपये पर बंद हुए। चीनी की इस किस्म का औसत भाव (ऊपरी और निचली कीमतों का औसत) 22 रुपये गिरकर 3,166 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। चीनी एम की एक्स-फैक्टरी कीमतें आज 70 रुपये फिसलकर 2,750 से 2,800 रुपये पर आ गईं, जो गुरुवार को 2,820  से 2,870 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुई थीं। 

 
अक्टूबर, 2017 में चालू पेराई सीजन शुरू होने के बाद चीनी की कीमतें लगातार गिर रही हैं। बेंचमार्क किस्म चीनी एम की औसत कीमतें इस सीजन में अब तक 18 फीसदी लुढ़क चुकी हैं, जिसकी वजह पेराई सीजन 2017-18 और 2018-19 में चीनी के भारी उत्पादन के अनुमान हैं।  वाशी की एक थोक विक्रेता कल्पेश ट्रेडिंग कंपनी के मालिक रमेश राज ने कहा, 'खरीदार न होने से बाजार में अति आपूर्ति की स्थिति है। चीनी कारोबारी अपना भंडार कम करने के लिए कम कीमतों पर बिक्री कर रहे हैं। यहां तक कि मिलों ने भी आगे आपूर्ति और बढऩे के अनुमानों की वजह से अपनी कीमतें घटा दी हैं। चीनी मिलों पर अपना स्टॉक बेचने का तगड़ा दबाव है क्योंकि उन्हें किसानों को गन्ने की बकाया राशि चुकानी है। इस वजह से इस साल पूरे वर्षभर चीनी की कीमतों पर दबाव रहने के आसार हैं।'
 
इस साल चीनी के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होने से पिछले कुछ सप्ताह के दौरान बाजार में चीनी आपूर्ति बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस क्षेत्र की शीर्ष संस्था भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा है कि 31 मार्च, 2018 तक देश का चीनी उत्पादन 45 फीसदी बढ़कर 281.8 लाख टन पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इस समय तक 188.9 लाख टन था।  इस्मा ने दूसरे अग्रिम अनुमानों में कहा था कि देश में चालू पेराई सीजन 2017-18 में 295 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा, जबकि पिछले साल 203 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। बीते पेराई सीजन की करीब 40 लाख टन चीनी बची होने से चालू वर्ष में कुल उपलब्धता बढ़कर 335 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है। इस समय चीनी की कीमतों को लेकर रुझान कमजोर नजर आ रहा है क्योंकि अगले साल भी करीब 300 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है। इस्मा ने हाल में एक बयान में कहा, 'घरेलू बिक्री से कम दाम मिलने और वैश्विक चीनी बाजारों में भी कीमतें अच्छी न होने से मिलें किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं जुटा पा रही हैं।'
 
इस्मा का अनुमान है कि इस साल मार्च तक भारत में गन्ने का कुल बकाया 160 से 170 अरब रुपये पर पहुंच गया है। केयर रेटिंग्स में शोध विश्लेषक भाग्यश्री भाटी ने कहा, 'भारत में आपूर्ति की स्थिति का अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों पर असर पड़ रहा है। हालांकि भारत चीनी का सबसे बड़ा निर्यातक नहीं है, लेकिन देश में सरप्लस चीनी होने पर निर्यात किया जाता है। सरकार ने इस साल चीनी उत्पादन में सालाना आधार पर 45.4 फीसदी बढ़ोतरी होने की संभावना को मद्देनजर रखते हुए चालू चीनी वर्ष 2017-18 में भी 20 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी है। इसके अलावा यूरोपीय संघ, चीन, थाईलैंड में भी चीनी का उत्पादन बढऩे के आसार हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति में बढ़ोतरी हो रही है। इससे 2017-18 में अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव पैदा होने के आसार हैं।'
 
वैश्विक स्तर पर भी चीनी की ज्यादा आपूर्ति से इसके अंतरराष्ट्रीय भाव 23.9 फीसदी टूटे हैं। ये अप्रैल, 2017 में 465.1 डॉलर प्रति टन थे, जो मार्च, 2018 में 354.1 डॉलर प्रति टन पर आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन ने मार्च में अनुमान जताया है कि 2017-18 में वैश्विक चीनी सरप्लस करीब 52 लाख टन रहेगा। इस संगठन का अनुमान है कि 2017-18 में वैश्विक चीनी उत्पादन 17.87 करोड़ टन रहेगा, जो 2016-17 के उत्पादन 16.82 करोड़ टन से 6.2 फीसदी अधिक है। वहीं वैश्विक खपत 17.36 करोड़ टन रहेगी, जो 2016-17 की खपत 17.08 करोड़ टन से 1.6 फीसदी अधिक है। 
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