होम » Commodities
«वापस

'छोटी आभूषण फर्मों को कर्ज दें बैंक'

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 08, 2018 09:31 PM IST

आभूषण विनिर्माताओं की संस्था अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) ने ऋणदाताओं से आग्रह किया है कि आभूषण क्षेत्र के लघु एवं मझोले उद्योगों को कर्ज मुहैया कराया जाए ताकि उनका परिचालन बंद न हों। दरअसल, पीएनबी-नीरव मोदी घोटाले के बाद बैंक कर्ज देने में सतर्कता बरत रहे हैं, जिससे आभूषण उद्योग को कार्यशील पूंजी जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक महीने पहले सामने आए 115 अरब रुपये के पीएनबी-नीरव मोदी घोटाले के बाद बैंकों ने कर्ज में जांच-पड़ताल बढ़ा दी है। यह घोटाला सामने आने के बाद ऋणदाताओं ने गिरवी रखे आभूषण शेयरों का थर्ड पाटी निरीक्षण, ऑडिट और मूल्यांकन कड़ा कर दिया है। 
 
जिन आभूषण कंपनियों की बैलेंस शीट अच्छी है और जिनका ऋणदाताओं के साथ बेहतर रिकॉर्ड रहा है, वे आसानी से कार्यशील पूंजी जुटा पा रहे हैं। लेकिन एसएमई और एमएसएमई, विशेष रूप से पहली बार कर्ज लेने वाले कई दिक्कतों से जूझ रहे हैं। छोटी इकाइयां या तो पूर्ण स्वामित्व वाली हैं या साझा स्टार्टअप हैं, इसलिए उन्हें उधारी की रकम से दोगुनी की कीमत की संपत्तियां गिरवी रखनी पड़ती हैं।  मुंबई में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम मंथन से इतर जीजेसी के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने कहा, 'आजकल ऋणदाता 100 फीसदी गिरवी और शेयर का 100 फीसदी गिरवीनामा मांग रहे हैं, जो 200 फीसदी हो जाता है। एसएमई और एमएसएमई के पास पहले ही मामूली पूंजी आधार है और अब नियम कड़े होने से उनके वजूद पर संकट पैदा हो गया है। इसलिए हम चाहेंगे कि ऋणदाता 50 करोड़ रुपये तक के ऋण गिरवी के कम प्रतिशत पर मंजूर करें ताकि एसएमई और एमएसएमई का वजूद बचा रहे।'
 
इस बीच पीएनबी-नीरव मोदी घोटाले के बाद कारोबारी रुझान प्रभावित हुआ है। एसएमई को ऋणदाताओं की कड़ी जांच-पड़ताल और ऑडिट का सामना करना पड़ रहा है। आभूषणों की बिक्री पुराने गहनों के बदले नए गहने और योजना से संबंधित अग्रिम भुगतान तक सीमित हो गई है। 
कीवर्ड gold,सराफा बाजार, आभूषण,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक