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एमएसपी से नीचे आया गेहूं का भाव

राजेश भयानी | मुंबई Apr 08, 2018 09:31 PM IST

गेहूं के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे 1,735 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। मार्च के दूसरे पखवाड़े से गेहूं की नई फसल बाजार में आनी शुरू हो चुकी है और गेहूं की कीमतों में आई गिरावट के लिए इसी को जिम्मेदार माना जा रहा है।  मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से गेहूं की नई फसल आनी शुरू हो गई है। हालांकि पहले तैयार हुई यह अगैती फसल गुणवत्ता के पैमाने पर उतनी खरी नहीं उतर पाई है। एक महीने पहले फसल पकने के समय आंधी-तूफान आ जाने से गेहूं की पैदावार प्रभावित हुई है। ऐसे में छोटे किसानों ने सरकारी खरीद एजेंसियों का इंतजार किए बगैर अपना गेहूं बाजार में बेचना शुरू कर दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले दो सप्ताह में गेहूं की मंडियों में इसके भाव औसतन 6-8 फीसदी तक कम हो गए हैं।
 
यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि कुछ इलाकों में तिलहन, दलहन एवं कपास का कारोबार भी एमएसपी से कम भाव पर हो रहा है। इस सूची में अब गेहूं जैसी मुख्य फसल भी शामिल हो गई है। मध्य प्रदेश में उपजे गेहूं की गुणवत्ता आम तौर पर उत्तर भारत के गेहूं से बेहतर है। वहां की सरकार ने गेहूं पर एमएसपी के अलावा किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी देने का ऐलान किया हुआ है।  फिलहाल सौराष्ट्र क्षेत्र में औसत किस्म का गेहूं 1550 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है जबकि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में इसका भाव 1650 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
 
एडलवाइस एग्री सर्विसेज ऐंड क्रेडिट की अनुसंधान प्रमुख प्रेरणा देसाई कहती हैं, 'इन दिनों बाजारों में आ रहे गेहूं में नमी होने से उनकी कीमतें एमएसपी से नीचे आ गई हैं। कई उत्पादक क्षेत्रों में कटाई के ऐन पहले आए आंधी-तूफान ने गेहूं की गुणवत्ता को खराब कर दिया है। हमारा आकलन है कि पिछले साल की तुलना में इस बार गेहूं की पैदावार 8-10 फीसदी कम रह सकती है।' सरकारी अनुमानों के मुताबिक पिछले साल रिकॉर्ड 985 लाख टन गेहूं की पैदावार हुई थी जबकि एडलवाइस ने 980 लाख टन का अनुमान लगाया था। 
 
प्रेरणा के मुताबिक अब भी कई इलाकों में गेहूं की फसल अभी तक खेतों में ही खड़ी है लिहाजा उपज का सही अंदाजा इसकी कटाई के बाद ही लगाया जा सकेगा। हालांकि उनका अनुमान है कि गेहूं की आवक के अनुमानों से कम रहने की सूरत में इसके भाव एमएसपी से नीचे के स्तर पर नहीं रह पाएंगे।  गेहूं के प्रमुख उत्पादक राज्यों- पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई फसल की आवक शुरू होने में अभी दस दिनों का वक्त लगेगा। वैसे कारोबारी इन उत्तर भारतीय राज्यों में पिछले दो हफ्तों से पड़ रही गर्मी के चलते पैदावार पर थोड़ा-बहुत फर्क पडऩे की आशंका जता रहे हैं। वैसे गर्मी बढऩे से हुए नुकसान की असली जानकारी तो बाद में ही हो पाएगी।
 
फ्रेंडशिप ट्रेडर्स के निदेशक देवेंद्र वोरा कहते हैं, 'जब तक मंडियों में कम गुणवत्ता वाले या खराब गेहूं की आवक बंद नहीं होगी, तब तक कीमतों में दोबारा तेजी आने की संभावना बहुत कम है।' हालांकि आटा मिलें कम भाव वाले इस गेहूं की खरीद कर रही हैं लेकिन उससे भी भाव को मजबूती नहीं मिल रही है। शिवाजी फ्लाउर मिल्स के प्रबंध निदेशक अजय गोयल कहते हैं, 'एमएसपी से कम भाव पर गेहूं बिकने की एक वजह यह है कि पश्चिम महाराष्ट्र जैसे इलाकों में सरकारी खरीद एजेंसियां उतनी कारगर नहीं हैं और न ही अधिक खरीदी केंद्र ही बने हैं।' आटा मिलों के पास अधिक मात्रा में गेहूं भंडारण के लिए तरलता नहीं है लेकिन बड़े कारोबारी खासकर कॉर्पोरेट खरीदार इस गेहूं के भंडारण में शामिल हो सकते हैं।
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