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उद्योग झेलेगा 3 अरब रुपये का घाटा

जयजित दास | भुवनेश्वर Apr 08, 2018 09:32 PM IST

जूट के बोरों के दामों में प्रति टन करीब 3,000 रुपये तक की कटौती करने के टैरिफ कमीशन (शुल्क आयोग) के फैसले से जूट उद्योग को धक्का पहुंचा है। कीमतों में इस गिरावट की वजह से उद्योग को प्रति वर्ष तीन अरब रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। कीमतों में इस संशोधन के बाद खाद्यान्न और चीनी की पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जूट के बोरे अब सरकारी एजेंसियां उद्योग की औसत कीमत से 5-7 प्रतिशत कम पर खरीदेंगी। टैरिफ कमीशन के अनुसार, ए और बी-टाइप के जूट के बोरों की मौजूदा कीमतें क्रमश: 72,345 रुपये प्रति टन और 69,585 टन हैं। कमीशन की यह रिपोर्ट अप्रैल 2016 और मार्च 2017 के बीच जूट आयुक्त के कार्यालय द्वारा एकत्रित एक वर्ष की कीमतों के आंकड़ों पर आधारित है। जूट अनुसंधान करने वाली केंद्रीय संस्था - भारतीय जूट उद्योग अनुसंधान संघ (आईजेआईआरए) के 2016 के उत्पादकता मानकों का भी इसमें प्रयोग किया गया है। इसे राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) द्वारा मंजूरी दी गई थी। उद्योग मार्च 2018 की टैरिफ कमीशन की दो भागों वाली इस रिपोर्ट को चुनौती दे सकता है। टैरिफ कमीशन औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अधीन सिफारिश करता है।

 
उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि यह किसी 'महत्त्वाकांक्षी प्रकार के डेटा' पर आधारित परिणाम है। इसकी प्रवृत्ति निर्देशात्मक है और इसलिए यह जल्दबाजी में किया गया कार्य है तथा सतही है। यह सिर्फ मेज पर किए गए अनुसंधान पर आधारित है और उद्योग की सही तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता है। इसके लिए कोई वास्तविक कार्य नहीं किया गया है। यह उद्योग को बर्बाद कर देगा। दिलचस्प बात यह है कि बंगाल में 70 विभिन्न जूट मिलें परिचालन कर रही हैं। हालांकि, आयोग ने 2016-17 के बी-टाइप के बोरों के लिए 20 जूट मिलों और ए-टाईप के बोरों के लिए 16 जूट मिलों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इकाइयों से उपलब्ध आंकड़ों को लागत और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित किया गया था। रिपोर्ट के सारांश के मुताबिक, आयोग ने चरणबद्ध पद्धति अपनाई थी जिसे जूट बोरों की कीमतें तय करने के लिए 2001 में कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई थी।
 
उद्योग पहले ही आईजेआईआरए के नियमों को अदालत में चुनौती दे चुका है। उद्योग पर नजर रखने वालों के अनुसार टैरिफ कमीशन ने जल्दबाजी में अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा कराई थी क्योंकि वह सितंबर 2017 में कलकत्ता उच्च न्यायालय में लिखित वादा कर चुका था कि जूट आयुक्त के कार्यालय से अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच एक वर्ष के ए और बी-टाईप के 580 ग्राम के बी ट्विल जूट बारों के संपूर्ण आंकड़े मिलते ही वह अपनी रिपोर्ट जमा करा देगा।
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