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सिकुड़ रहा डेनिम उद्योग का परिचालन मार्जिन

विनय उमरजी | अहमदाबाद Apr 10, 2018 08:56 PM IST

कपड़ा उद्योग में तालमेल न होने से घट रहा परिचालन मार्जिन

15-20 प्रतिशत क्षमता उपयोग न होने से घरेलू डेनिम क्षेत्र वित्त वर्ष 19 के दौरान
लाभ पर दबाव से जूझता रहेगा

डेनिम उद्योग के परिचालन मार्जिन में गिरावट आ रही है। 2015-16 के 13 प्रतिशत से घटकर यह वित्त वर्ष 18 में करीब 10 प्रतिशत हो गया है। कपड़े में निरंतर अधिकता और डेनिम तथा परिधान क्षमता वृद्धि के बीच तालमेल न होने सेे ऐसा हो रहा है। इंडिया रेटिंग ऐंड रिसर्च (इंड-रा) का अनुमान है कि 15-20 प्रतिशत क्षमता का उपयोग न होने से वित्त वर्ष 19 के दौरान घरेलू डेनिम क्षेत्र के मार्जिन परदबाव बना रहेगा। नंदन डेनिम, अरविंद, केजी डेनिम, जिंदल वल्र्डवाइड और आरवी डेनिम के नेतृत्व में भारत विश्व का एक प्रमुख डेनिम कपड़ा विनिर्माता है, जिसकी प्रति वर्ष क्षमता लगभग 150 करोड़ मीटर (एमएमपीए) है। वित्त वर्ष 19 तक कई भागीदारों की ओर से 10-15 करोड़ मीटर प्रति वर्ष की अतिरिक्त क्षमता शुरू किए जाने की वजह से प्रतिस्पर्धा तेज होने वाली है।

हालांकि, इंड-रा का कहना है कि परिधान क्षमता में समान वृद्धि नहीं हो रही है। इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यय के लिए बढ़ती आय, अनछुए कस्बाई इलाके और युवाओं में डेनिम के प्रति बहुमुखी फैशन आकर्षण की वजह से इस खंड में लंबी अवधि की मांग क्षमता की संभावना बरकरार है। इंड-रा का मानना है कि मौजूदा मंदी अपेक्षाकृत लंबी हो सकती है, जिसकी आंशिक वजह वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान उद्योग के विनियामक अवरोध हैं। इंड-रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 18-19 में परिचालन मार्जिन 10-11 प्रतिशत के दायरे में रहेगा।

निर्यात द्वारा कुछ हद तक क्षमता का प्रयोग किए जाने के साथ-साथ बुआई में बढ़ोतरी की वजह से कपास की कीमतों में नरमी जैसे कारक इस स्थिति को आसान बना सकते थे। इंड-रा के अनुसार, किसानों द्वारा सोयाबीन से कपास की ओर रुख करने के कारण 2017-18 के सीजन में प्राकृतिक फाइबर में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि नजर आई है। वित्त वर्ष 19 के दौरान अधिक उत्पादन के कारण कपास की कीमतों में नरमी आ सकती है और डेनिम कपड़ा विनिर्माताओं के लिए मार्जिन संकुचन को कम करने में मदद मिल सकती है। इंड-रा ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता में वृद्धि के बावजूद शुल्क कटौती की दिक्कत के कारण निर्यातकों को भी लाभ में कुछ असर दिखेगा। इसके अलावा, भारत की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के संबंध में विश्व व्यापार संगठन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के साथ चल रहे विवाद के किसी प्रतिकूल नतीजे से निर्यातकों के लाभ पर खासा असर पड़ सकता है।

 

कपास उत्पादन अनुमान 360 लाख गांठ किया गया

भारतीय कपास संघ (सीआईए) ने मंगलवार को वर्ष 2017-18 के सत्र में कपास उत्पादन अनुमान को संशोधित कर 360 लाख गांठ किया है जो मार्च में लगाए गए 362 लाख गांठों के उत्पादन के अनुमान से दो लाख गांठ कम है। कपास की प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की होती है। एक बयान में कहा गया है कि यह गिरावट, चालू कपास सत्र (अक्टूबर 2017- सितंबर 2018) में महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में प्रत्येक स्थान पर एक-एक लाख गांठ कपास उत्पादन कम होने की वजह से आई है। सीएआई ने अनुमान लगाया है कि सत्र के दौरान 170 किग्रा की एक गांठ वाली कुल कपास की आपूर्ति 410 लाख गांठों की होगी। भाषा
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