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बेमौसम बारिश से कुछ जगह नुकसान

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Apr 10, 2018 08:57 PM IST

फिर बारिश हुई तो हो सकता है बड़ा नुकसान

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की करीब 30 फीसदी फसल प्रभावित
बारिश से टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों की कुछ फसलों को नुकसान
महाराष्ट्र के सोलापुर-नासिक और सातारा क्षेत्र में अंगूर की पछेती फसल को नुकसान पहुंचा

हाल में उत्तर और मध्य भारत में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की खड़ी फसल को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि ज्यादातर फसल या तो कट चुकी है या पकने के नजदीक है। अगर अगले कुछ दिनों में फिर भारी बारिश हुई तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है।  हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की फसल को मामूली नुकसान पहुंचा है, जहां कुछ खेतों में पानी जमा हो गया है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की करीब 30 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देश में अन्य जगहों पर आम के बागान को भी नुकसान पहुंचा है क्योंकि अभी इनमें बौर आ रहे हैं या फल छोटे एवं कच्चे हैं। 

हालांकि बारिश से टमाटर और फूलगोभी जैसे सब्जियों की कुछ फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से सोलापुर-नासिक और सातारा क्षेत्र में अंगूर की पछेती फसल को नुकसान पहुंचा है।  चने की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि राजस्थान को छोड़कर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पहले ही कटाई हो चुकी है।

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक जीपी सिंह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'अभी हमें गेहूं की खड़ी फसल को बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है क्योंकि हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसल पहले ही पक चुकी है, जबकि मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में कटाई जारी है। लेकिन तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि अभी चिंता की कोई बात नहीं है।' 

उन्होंने कहा कि उत्पादक क्षेत्रों से मिली रिपोर्ट यह संकेत देती है कि 99 फीसदी खड़ी फसल प्रभावित नहीं हुई है और जो नुकसान हुआ है, वह मंडियों में हुआ है। किसानों ने मंडियों में बेचने के लिए अपनी फसलें एकत्रित कर रखी हैं। सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की कटाई के बाद गेहूं की देरी से बुआई होती है। वहां खेतों में पानी जमा होने की कुछ खबरेें आ सकती हैं, लेकिन वहां भी फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होने की उम्मीद है।

सिंह ने कहा, 'हरियाणा की कुछ मंडियों में गेहूं की कुछ बोरियों को नुकसान पहुंचा है। ये बोरियां काफी समय से वहां पड़ी हुई थी क्योंकि उनमें नमी का स्तर 15 से 16 फीसदी था, जबकि स्वीकृत स्तर 12 फीसदी है।' उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से कहा है कि वे ज्यादा नमी वाला गेहूं मंडियों में बेचने के लिए लेकर न आएं, लेकिन किसान फिर भी नमी वाली फसल बेचने के लिए आ रहे हैं। सिंह ने कहा, 'अगर रोजाना कुछ घंटे भी अच्छी धूप खिली तो नमी का स्तर कम हो जाएगा।'

गेहूं रबी सीजन में उगाया जाने वाला प्रमुख खाद्यान्न है। इस साल इसकी बुआई करीब 3.04 करोड़ हेक्टेयर में हुई थी, जो पिछले साल से करीब 4,27,000 हेक्टेयर कम है। भारतीय दलहन एïवं अनाज संघ (आईपीजीए) के उपाध्यक्ष बिमल कोठारी ने कहा, 'चने की खड़ी फसल को भी नुकसान की अभी तक कोई बड़ी खबर नहीं मिली है। इसके अलावा कल चने की कीमतें भी घटी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है।' उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में चने की ज्यादातर कटाई हो चुकी है। अगर यह खेतों में पड़ा होता तो इसे नुकसान पहुंच सकता था। 

लेकिन महाराष्ट्र के नासिक-सोलापुर और सातारा क्षेत्र के सब्जी किसानों को कुछ नुकसान झेलना पड़ा है। शुरुआती रिपोर्ट दर्शाती हैं कि इन क्षेत्रों में टमाटर, फूलगोभी की खड़ी फसलों को कुछ नुकसान पहुंचा है।  भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे ने कहा, 'ज्यादा नमी से टमाटर और फूलगोभी में फफूंदी लगने की आशंका बढ़ जाती है और उनकी बाजार कीमत कम हो जाती है।' उन्होंने कहा कि आम की फसल को कुछ नुकसान हो सकता है क्योंकि तेज हवाओं में छोटे फल गिर जाते हैं, जबकि बौर आ रहे पेड़ों को भी नुकसान पहुंचता है। अगर अगले कुछ दिनों में फिर से भारी बारिश हुई तो नुकसान होगा। 

मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के मुख्य मौसमविज्ञानी महेश पलावत ने कहा, 'अगले कुछ दिनों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तगड़ा पश्चिमी विक्षोभ पैदा होने के आसार हैं। इससे 12 अप्रैल तक बेमौसम बारिश और तेज हवाएं आ सकती हैं। उत्तर के मैदानी इलाकों में सुबह और दोपहर के बाद 1 से 2 घंटे बारिश हो सकती है।' उन्होंने कहा कि अभी तक बारिश छिटपुट रही है और यह अगले कुछ दिनों में भी ऐसी ही रह सकती है। लेकिन अगर इसकी तीव्रता बढ़ती है तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। 
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