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चीनी कंपनियों के शेयर चढ़े

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 10, 2018 08:58 PM IST

थोक बाजार में चीनी के दाम गिरकर 28 महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं। कम मांग और ज्यादा आपूर्ति से चीनी के थोक भाव 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से कम हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें कम होने से फिलहाल कीमतों में सुधार होना मुश्किल है। ऐसे हालातों में चीनी मिलों को राहत देने के लिए सरकार वित्तीय सहायता की घोषणा कर सकती है। इन संभावनाओं से चीनी के दाम गिरने के बावजूद चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। मुंबई के थोक बाजार में आज चीनी के दाम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गए। इस स्तर पर चीनी 28 दिसंबर, 2015 को थी। चीनी की एक्स-मिल कीमतें 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हैं। चीनी के दाम जनवरी से अभी तक करीब 9 फीसदी और पिछले एक महीने में करीब 7 फीसदी कम हुए हैं। पिछले एक साल में दाम करीब 25 फीसदी टूटे हैं। चीनी सस्ती होने का सीधा असर मिलों की माली हालत पर पड़ रहा है, जिससे मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया भी बढ़ता जा रहा है। चीनी मिलों का कहना है कि देशभर में चीनी की औसत कीमतें लागत से कम हैं। 
 
किसानों के बकाया को लेकर परेशान चीनी उद्योग सरकार से मदद की गुहार पहले ही कर चुका है। इस्मा ने सरकार से बकाया चुकाने में मदद करने की गुहार कुछ दिन पहले लगाई थी। बाजार और चीनी मिल मालिकों का कहना है कि सरकार उनकी बात मान चुकी है और जल्द ही वह प्रति टन गन्ने पर 55 रुपये की मदद देने का ऐलान कर सकती है। बाजार में यह बात फैलते ही चीनी कंपनियों के शेयर उछलने लगे। बीएसई पर चीनी मिलों के शेयर महज एक दिन में 20 फीसदी से ज्यादा तक चढ़ गए। केएम शुगर मिल्स के शेयर 20.19 फीसदी, राजश्री शुगर 10.87 फीसदी, द्वारिकेश शुगर 9.53 फीसदी मजबूत हुए। लगभग सभी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। ऐंजल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता कहते हैं कि कीमतें कम होने के कारण मिलें घाटे में हैं, ऐसे में सरकार चीनी उद्योग के लिए कुछ मदद करती है तो उसका फायदा किसानों से कहीं ज्यादा चीनी मिलों को होगा। बाजार में सकारात्मक माहौल के कारण चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई। 
 
बकाया न चुकाने वाली मिलों पर करें कार्रवाई
 
खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत सभी प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर किसानों को गन्ने की बकाया राशि का भुगतान न करने वाली मिलों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। देश के सालाना चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का 80 फीसदी योगदान है। पासवान ने पत्र में लिखा है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने घरेलू चीनी मिलों की नकदी की स्थिति सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे चीनी की एक्स-मिल कीमतें पिछले एक साल से काफी हद तक स्थिर हैं। इससे चीनी उद्योग को नकदी की किल्लत से बाहर निकलने में मदद मिली है। हालांकि कुछ मिलों पर बीते वर्षों की गन्ने की राशि बकाया है। चालू सत्र (2017-18) में गन्ना बकाया काफी बढ़ा है, जो हम सब के लिए 'गंभीर चिंता' का विषय है। पासवान ने कहा कि यह मामला खाद्य विभाग के सचिव ने राज्यों के संबंधित अधिकारियों के सामने 3 मार्च को उठाया था। मंत्री ने लिखा, 'मैं इसलिए चाहता हूं कि आप इस मामले में दखल दें और सभी चीनी मिलों को चीनी सीजन 2017-18 और बीते वर्षों की गन्ने की बकाया राशि तुरंत चुकाने के कड़े निर्देश दें।' 
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