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'चीनी क्षेत्र को सब्सिडी की योजना अभी नहीं'

भाषा | नई दिल्ली Apr 11, 2018 08:45 PM IST

नकदी संकट का सामना करने वाली चीनी मिलों को संकट से निजात दिलाने के लिए खाद्य मंत्रालय की गन्ना उत्पादकों को सब्सिडी प्रदान करने की तत्काल कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने चीनी मिलों को चीनी के अधिशेष स्टॉक को खत्म करने और घरेलू कीमतों में सुधार लाने के लिए 20 लाख टन चीनी का निर्यात करने के लिए भी कहा है।  सितंबर में समाप्त होने वाले विपणन वर्ष 2017-18 में घरेलू उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद के बीच सरकार ने पहले से ही आयात शुल्क को दोगुना कर 100 प्रतिशत कर दिया है और चीनी पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क खत्म कर दिया है।  इसके अलावा, खाद्य मंत्रालय ने हाल ही में न्यूनतम सांकेतिक निर्यात कोटा (एमआईईक्यू) योजना के तहत 2 लाख टन चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी है और प्रत्येक चीनी मिल के लिए उनके उत्पादन स्तर के आधार पर एक अनिवार्य कोटा तय किया है। 
 
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'अभी, उत्पादन से संबद्ध सब्सिडी देने की कोई तत्काल योजना नहीं बनाई है जो हमने कुछ साल पहले दी थी। हमने दो योजनाओं की घोषणा की है ताकि चीनी मिलों को अपने अतिरिक्त चीनी स्टॉक का निर्यात करने में मदद मिले और इससे स्थिति में सुधार हो सके।' भारत का चीनी उत्पादन विपणन वर्ष 2016-17 के 2.03 करोड़ टन से बढ़कर 2.95 करोड़ टन होने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में चीनी की एक्स मिल कीमत और खुदरा कीमतों में गिरावट आई है। गन्ना बकाया राशि खत्म की किसी योजना के सवाल पर अधिकारी ने कहा, 'अधिशेष चीनी को केवल निर्यात के रूप में खत्म किया जा सकता है और इसके लिए हमने हाल ही में एमईआईक्यू और डीएफआईए नामक दो योजनाओं की घोषणा की है।' 
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