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अक्षय तृतीया चमकाएगी सोना!

राजेश भयानी | मुंबई Apr 11, 2018 10:53 PM IST

18 अप्रैल को अक्षय तृतीया, सुधर सकते हैं सोने के दाम

कीमतों और जीएसटी का अक्षय तृतीया से पहले सोने की खरीदारी पर असर
पिछले साल अक्षय तृतीया के समय स्टैंडर्ड सोने के दाम 28,765 रुपये प्रति 10 ग्राम थे
इस साल सोने के दाम 6.7 फीसदी बढ़कर 30,690 रुपये पर पहुंच गया है
पिछले साल मार्च में सोने का आयात 103.7 टन रहा था
जीएफएमएस के मुताबिक इस साल मार्च में 52.5 टन रहने का अनुमान है

अक्षय तृतीया से पहले सोने की मांग कमजोर है। इस त्योहार को सोने की खरीदारी के लिए शुभ अवसर माना जाता है। यह इस बार 18 अप्रैल को है। सोने की मांग तब भी कम है, जब इस त्योहार के साथ विवाह सीजन भी चालू है। सोने की मांग कम होने की कई वजह हैं। इस साल सोने की कीमतें पिछले साल से ज्यादा हैं। वहीं, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ग्राहकों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।  पिछले साल अक्षय तृतीया 28 अप्रैल को थी। उस समय स्टैंडर्ड सोने के दाम 28,765 रुपये प्रति 10 ग्राम थे, जो इस समय 6.7 फीसदी बढ़कर 30,690 रुपये पर पहुंच गए हैं।

पिछले साल जीएसटी नहीं था। यहां तक कि नकद खरीद पर भी 3 फीसदी जीएसटी लगता है। नकद खरीद पिछले साल की तुलना में कम हो गई है। पिछले साल तक नकद खरीद पर कोई कर नहीं लगता था। दूसरी वजह ग्रामीण बाजारों में कम मांग है। भारत में सोने या आभूषणों की एक-तिहाई मांग ग्रामीण क्षेत्रों से आती है।

लगभग सभी जिंसों के ज्यादा उत्पादन से बहुत सी जगहों पर कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गई हैं। यहां तक कि अक्षय तृतीया से पहले के महीने में सोने के आयात के आकड़े भी मांग का रुझान दिखाना शुरू कर देते हैं। हालांकि इस साल मार्च में सोने का आयात कमजोर रहा। पिछले साल मार्च में सोने का आयात 103.7 टन रहा था। जीएफएमएस का अनुमान है कि यह इस साल मार्च में 52.5 टन ही रहेगा।

पिछले साल अप्रैल में देश में 93.6 टन सोने का आयात हुआ था। हालांकि इस साल अप्रैल के शुरुआती  दिनों में कम आयात हुआ है, जिसका मतलब है कि सराफों को त्योहार पर बिक्री से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं।  स्काईमेट ने सामान्य मॉनसून का अनुमान जताया है। कम ग्रामीण मांग की दूसरी वजह यह भी है कि ग्रामीण बेरोजगारी पिछले साल की तुलना में अधिक है।

बीएसई-सीएमआईई बेरोजगारी सूचकांक के मुताबिक एक साल पहले ग्रामीण भारत का बेरोजगारी सूचकांक 3.6 था, जो इस समय 6.27 है। वहीं शहरी बेरोजगारी का सूचकांक पिछले साल 4.4 था, जो इस समय 6.67 पर है।  हालांकि अनमोल ज्वैलर्स के संस्थापक इशू दतवानी ने कहा कि इस समय खरीदारी का रुझान नहीं है। लेकिन यह रुझान अक्षय तृतीया से कुछ दिन पहले सुधरने की उम्मीद है और मेरा मानना है कि इस बार मांग कुलमिलाकर पिछले साल के आसपास रहेगी।

कीवर्ड अक्षय तृतीया, स्टैंडर्ड सोना, त्योहार, विवाह, आयात, ग्रामीण बेरोजगारी, Akshaya Tritiya, GFMS, Gold, Wedding Season, Rural Demand, Jewellery,

  
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