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गैर-बासमती का निर्यात 34 फीसदी बढ़ा

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 12, 2018 09:53 PM IST

भारत से गैर-बासमती चावल का निर्यात अप्रैल, 2017 से जनवरी, 2018 के बीच 34 फीसदी बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि अफ्रीकी देश थाईलैंड के बजाय भारत से आयात करने लगे हैं क्योंकि अब उनके लिए भारत से आयात करना सस्ता पडऩे लगा है। हालांकि समीक्षाधीन अवधि में बासमती चावल का निर्यात स्थिर रहा। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल, 2017 से जनवरी, 2018 तक के पहले 10 महीनों में भारत का गैर-बासमती चावल निर्यात 70.1 लाख टन रहा, जिसकी कीमत 289 करोड़ डॉलर थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 52.5 लाख टन निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 197 करोड़ डॉलर थी। 
 
भारत का गैर-बासमती चावल निर्यात बढऩे से थाईलैंड का कम हुआ है। भौगोलिक लाभ के अलावा थाईलैंड और भारत से चावल का निर्यात मुद्रा के उतार-चढ़ाव से भी तय होता है। कुछ महीनों पहले तक अफ्रीकी देश चावल आयातक थाईलैंड से आयात को तरजीह देते थे। लेकिन थाईलैंड की करेंसी बहत मजबूत होने से उन्हें भारत जैसा वैकल्पिक चावल आपूर्तिकर्ता तलाशने को मजबूर होना पड़ा।  एपीडा के निदेशक ए के गुप्ता ने कहा, 'थाईलैंड से कम निर्यात के कारण वैश्विक चावल बाजार में भारत की हिस्सेदारी मामूली बढ़ी है। भारत से गैर-बासमती चावल के निर्यात में अगले कुछ महीनों के दौरान बढ़ोतरी जारी रहेगी।'
 
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने अनुमान जताया है कि कैलेंडर वर्ष 2017 में थाईलैंड में 3.37 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ है, जो कैलेंडर वर्ष 2016 में उत्पादित चावल 3.26 करोड़ टन से केवल 3 फीसदी अधिक है। थाईलैंड में 2016 में चावल का उत्पादन 2015 में 2.74 करोड़ टन के मुकाबले 19 फीसदी बढ़ा था।  इस बीच थाईलैंड की करेंसी बहत अप्रैल 2017 से जनवरी, 2018 के बीच डॉलर के मुकाबले 9.6 फीसदी मजबूत हुई है। यह 34.35 से 31.34 पर आ गई है। हालांकि वित्त वर्ष 2018 के पहले 10 महीनों में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया महज 2 फीसदी मजबूत हुआ है। यह 64.85 से सुधरकर 63.59 पर आ गया है। 
 
थाईलैंड की सरकार ने कैंलेडर वर्ष 2018 में देश का चावल निर्यात 18 फीसदी घटकर 95 लाख टन रहने का अनुमान जताया है, जबकि यह पिछले वर्ष 1.16 करोड़ टन रहा था। इसके विपरीत भारत का बासमती चावल निर्यात अप्रैल, 2017 से जनवरी, 2018 के बीच 32.7 लाख टन पर स्थिर रहा है। इसकी वजह यूरोपीय संघ की कम खरीदारी रही, जहां हर साल करीब 3 लाख टन की खरीदारी करता है। गुप्ता ने कहा, 'बासमती ऊंची कीमत वाला उत्पाद है। हम वित्त वर्ष 2018 में इसके निर्यात में 5 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।'
 
एक चावल निर्यातक कंपनी अशर एग्रो के प्रबंध निदेशक वी के चतुर्वेदी ने कहा, 'अफ्रीकी देशों को गैर-बासमती चावल के निर्यात में भारत और थार्ईलैंड एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। अगर अफ्रीकी देशों के लिए थाईलैंड से आयात महंगा पडऩे लगता है तो वे भारत से खरीदारी शुरू करते हैं। भारत से 80 फीसदी गैर-बासमती चावल का निर्यात अफ्रीकी देशों को होता है। बहत के मजबूत होने से गैर-बासमती चावल के निर्यात के लिए भारत को थाईलैंड पर तरजीह दी जाने लगी है।'   एपीडा के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत का बासमती चावल निर्यात वित्त वर्ष 2017 में 39.8 लाख टन (कीमत 3.22 अरब डॉलर) रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के निर्यात 40.5 लाख टन (3.48 अरब डॉलर)  से मामूली कम है। 
 
अखिल भारतीय चावल निर्यात संघ के कार्यकारी निदेशक राजन सुंदरेशन का अनुमान है कि देश का बासमती चावल निर्यात  फरवरी और मार्च, 2018 में 6 से 6.5 लाख टन और होगा, जो वित्त वर्ष 2017-18 के आखिरी दो महीने हैं। सरकार निर्यातकों को लैटिन अमेरिकी देशों में बासमती के बाजार तलाशने के लिए कह रही है। सरकार ने उन निर्यातकों के लिए प्रोत्साहनों की पेशकश की है, जो लैटिन अमेरिकी देशों में होने वाले व्यापार मेलों में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं। 
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