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एनएमडीसी ने जापान और कोरिया को लौह अयस्क का निर्यात रोका

दशरथ रेड्डी | हैदराबाद Apr 13, 2018 10:00 PM IST

एनएमडीसी ने इस महीने से जापान और दक्षिण कोरिया को लौह अयस्क का निर्यात बंद कर दिया है क्योंकि सरकार ने कंपनी को दी हुई विशेष मंजूरी का नवीनीकरण नहीं किया है। पिछले वित्त वर्ष तक कंपनी इन दोनों देशों को हर साल 30 लाख टन उच्च ग्रेड के लौह अयस्क का निर्यात कर रही थी। केंद्र ने दोनों देशों की सरकारों के साथ विशेष समझौते के जरिये कंपनी को लंबी अवधि के करार (एलटीए) के तहत यह मंजूरी दी हुई थी।  केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए लौह अयस्क पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया था। तब से भारत से लौह अयस्क निर्यात की अधिकतम सीमा 30 लाख टन तय है। लौह अयस्क का यह सीमित निर्यात भी केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से होता है। मंत्रिमंडल दोनों देशों के लिए निर्यात कोटे और इस निर्यात पर 30 फीसदी के बजाय 10 फीसदी निर्यात शुल्क की मंजूरी देता है। 

 
एनएमडीसी के अधिकारियों ने कहा कि पिछली बार 2014 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 साल के निर्यात करार को मंजूरी दी थी, जिसका इस साल निर्यात शुरू करने के लिए नवीनीकरण जरूरी है। एनएमडीसी के एक वरिष्ठ मार्केटिंग अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'मुझे इस बात में संदेह है कि हम इस तिमाही या अगली तिमाही में कोई निर्यात कर पाएंगे। हमें नहीं पता कि सरकार इस साल निर्यात करार का नवीनीकरण करेगी या नहीं।' एलटीए के तहत लौह अयस्क निर्यात 2011 से 2014 के बीच बंद रहा क्योंकि 2006 में मंजूर पांच साल का करार 2011 में खत्म हो गया था। उद्योग के जानकारों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार एलटीए के तहत जापान और कोरिया को लौह अयस्क की आपूर्ति को मंजूरी नहीं देती है तो उसकी वजह एनएमडीसी को निर्यात शुल्क में विशेष रियायत से होने वाला राजस्व का नुकसान या लौह अयस्क की घरेलू मांग में बढ़ोतरी हो सकती हैं। 
 
अगर विशेष छूट के तहत जापान और कोरिया को होने वाले लौह अयस्क की निर्यात की एनएमडीसी के कुल उत्पादन या कोरिया और जापान के कुल लौह अयस्क आयात से तुलना करते हैं तो यह बहुत अधिक नहीं है। एक कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'जापान में लौह अयस्क की मांग 15 करोड़ टन है, जिसका आयात वह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से करता है।'
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