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'मूल्य वर्द्धन से एनएमडीसी को मिलेगी मजबूती'

बी दशरथ रेड्डी |  Apr 15, 2018 09:52 PM IST

एन बैजेंद्र कुमार ने छह महीने पहले सार्वजनिक क्षेत्र की लौह-इस्पात कंपनी एनएमडीसी की कमान बतौर चेयरमैन-सह प्रबंध निदेशक संभाली थी। नीतियों में बदलाव के बीच कुमार का कहना है कि कंपनी नए खनन पट्टïे के लिए बोली के माध्यम से आगे बढ़ेगी और मूल्य वद्र्धन के लिए निजी इकाइयों के साथ साझेदारी करेगी। बी दशरथ रेड्डी ने उनसे कंपनी से जुड़े विषयों और चुनौतियों सहित विभिन्न पहलुओं पर बात की। पेश हैं प्रमुख अंश:

 
स्थानीय लोगों और राज्य सरकार के विरोध के बाद छत्तीसगढ़ के नगरनार में इस्पात संयंत्र परियोजना मुश्किलों में फंंस गई है। एनएमडीसी इससे निपटने के लिए क्या कर रही है?
 
बिक्री के उद्देश्य से नियुक्त लेनदेन और विधि सलाहकारों ने कुछ मुद्दे उठाए हैं। मिसाल के तौर पर यह मुद्दा उठा है कि क्या अनुसूचित क्षेत्र में किसी सार्वजनिक कंपनी के अधीन पट्टे का निजीकरण किया जा सकता है। जो प्रतिक्रियाएं मिली हैं, उनके आधार पर रणनीतिक विनिवेश के लिए गठित अंतर मंत्रालय समूह ने सरकार से सिफारिश की है कि निजीकरण प्रक्रिया फिलहाल टाल दी जाए। लिहाजा हमने प्रक्रिया टाल दी है। नगरनार परियोजना में 3 से 4 साल की देरी हो गई है, लेकिन यह अब यह पूरी हो रही है। मैं सभी मुद्दे त्वरित गति से निपटाने की कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि मेरी प्राथमिकता पहले परियोजना पूरी करने की है। इस साल के अंत तक परियोजना पूरी हो जाएगी और परिचालन शुरू कर देगी।
 
वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा है? 
 
मूसलाधार बारिश, बाढ़ और नक्सली गतिविधियों के बाद भी हम उत्पादन अब तक के सर्वश्रेष्ठï स्तर (3.54 करोड़ टन) पर ले जाने में सफल रहे हैं। इन बाधाओं से निपटने और इनका असर खत्म करने के लिए हमारे लोगों ने दिन-रात मेहनत की है। बचेली, किरंदुल (छत्तीसगढ़) और डोनीमलाई (कर्नाटक) में हमारी ज्यादातर खदानों को फस्र्ट स्टार रेटिंग दी गई, जो सभी मानदंडों के आधार पर अधिकतक रेटिंग है। हमें डोनीमलाई में उत्पादन 2018-19 के लिए मौजूदा 1.2 करोड़ टन से बढ़ाकर 1.4 करोड़ टन करने की अनुमति मिल गई है। हमें अगले निर्माण कार्यों के लिए सभी आवश्यक अनुमति मिली गई है। हम हरसंभव तरीके से राष्ट्रीय खजाने में योगदान दे रहे हैं और 900 करोड़ रुपये से अधिक का अंतरिम लाभांश 
भी दिया है। 
 
बोली के माध्यम से एनएमडीसी खनन पट्टïा प्राप्त करने में उतनी सफल नहीं रही है। इसे आप कैसे देखते हैं?
 
जब तक हमें नामांकन आधार पर खनन अधिकार दिए गए, तब तक हमलोगों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। अब नीतियों बदलाव के बाद ज्यादातर खनन कंपनियों को नीलामी के जरिये खनन पट्टïे दिए जा रहे हैं। नए रास्ते से आगे बढऩे से हमें खनन पट्टïा प्राप्त करने में मदद नहीं मिली, क्योंकि प्रतिस्पद्र्धा को लेकर हमने आक्रामक रवैया नहीं अपनाया। अब हम आक्रामक रवैया अपनाएंगे। एनएमडीसी के पास प्रतिभा के साथ तकनीकी  दक्षता है और मानव संसाधन भी उपलब्ध हैं, जो खनन क्षेत्र में किसी भी तरह का दबाव झेल सकते हैं। 
 
क्या एनएमडीसी नई परियोजनाओं में निवेश के बारे में सोच रही है?
 
खनन के अलावा मूल्य वद्र्धन में भी निवेश की हमारी योजना है। हमारा मानना है कि मूल्य वद्र्धन एनएमडीसी को अधिक असरदार बनाएगा। अगर इस्पात उत्पादकों के पास उनकी खदानें होंगी तो खननकर्ता कंपनियां इस्पात संयंत्र भी लगा सकती हैं। खरीदार होने की स्थिति में ही मर्चेंट माइनिंग उपयोगी होता है। कर्नाटक में इस्पात संयंत्र के लिए हमारे पास जमीन है और झारखंड में जेएमडीसी के साथ हम ऐसी एक परियोजना के लिए जमीन से जुड़ी बातचीत को अंतिम रूप दे रहे हैं। 
 
क्या इन मूल्य वद्र्धन परियोजनाओं में एनएमडीसी निजी सहयोग के लिए तैयार है?
 
अंतिम चरणों में विनिवेश की कवायद करने के बजाय हम ऐसी परियोजनाओं के लिए शुरुआती स्तर पर निजी साझेदार के साथ आगे बढ़ेंगे। हम किसी भी ऐसे पक्ष से बातचीत के लिए तैयार हैं, जो 100 प्रतिशत या 26 प्रतिशत निवेश के लिए तैयार है। हमारी यही नीति होगी। 
 
इस साल लौह-अयस्क की मांग और इसकी कीमतों को लेकर एनएमडीसी का क्या अनुमान है? इस्पात उत्पादक कंपनियां अक्सर शिकायत करती हैं कि एनएमडीसी के दाम बाजार की वास्तविकताओं से दूर होते हैं। 
 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें भारत में लौह-अयस्क की कीमतों पर असर डालती हैं, लेकिन यह एकमात्र वजह नहीं है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 70 डॉलर प्रति टन के स्तर पर अधिक थीं तब भी भारत में कीमतें भिन्न स्तर पर थीं। बाजार में परिस्थितियों से सरोकार रखने के लिए एनएमडीसी हरेक महीने कीमतों की समीक्षा करती है। आने वाले समय में देश में इस्पात का उत्पादन बढऩे की उम्मीद है और इसका लौह-अयस्क की मांग पर सकारात्मक असर होगा। लौह-अयस्क की कीमतें कमोबेश मौजूदा स्तर पर स्थिर हो गई हैं और इस साल इसी स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। हम इस साल 3.6 से 3.7 करोड़ टन लौह-अयस्क आपूर्ति के लिए समझौते होने की उम्मीद कर रहे हैं। 
कीवर्ड NMDC, steel, iron ore,

  
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