होम » Commodities
«वापस

जेट ईंधन की मांग को लगे पंख

रॉयटर्स | सिंगापुर Apr 18, 2018 09:56 PM IST

देश के मध्यम वर्ग की हवाई यात्रा की ओर बढ़ती रुचि और सरकार द्वारा देश के ज्यादा से ज्यादा शहरों को विमानन सेवा से जोडऩे की कवायद के कारण इस साल देश में जेट ईंधन की मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकती है। विमानन ईंधन की मांग में इस तीव्र वृद्धि का मतलब यह है कि एशिया से यूरोप तक सिकुड़ते बाजार की वजह से देश की तेल शोधन कंपनियां विदेश में खेप नहीं भेजना चाहेंगी।  इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक, कई वर्षों के तीव्र आर्थिक विस्तार ने भारत को दुनिया का सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनाने में मदद की है। सरकार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने (जिसमें हवाई अड्ïडों का निर्माण और छोटे शहरों के लिए उड़ाने भरने के लिए छूट भी शामिल है) की महत्त्वाकांक्षी योजनाओं के कारण भी इसे सहारा मिला है।

 
सिंगापुर की ऊर्जा सलाहकार एफजीई के विश्लेषक श्री पारावैक्कारासू ने कहा, 'भारत के बड़े भौगोलिक विस्तार और समृद्ध होते उपभोक्ताओं को देखते हुए दीर्घावधि में देश के हवाई परिवहन क्षेत्र में वृद्धि की असीम संभावनाएं हैं।' कई उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि इस साल जेट ईंधन के लिए औसत मासिक मांग 7,00,000 टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकती है जो कि 2017 के रिकॉर्ड 6,23,000 टन और 2016 में 5,66,000 टन से अधिक है। इस प्रकार, इसमें 12 फीसदी की सालाना वृद्धि हो रही है, जबकि चीन में 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में अपनी अप्रत्याशित आर्थिक वृद्धि के दौरान ऐसा इजाफा हुआ था। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने इस साल जनवरी से मार्च तक 20.2 लाख टन विमानन ईंधन का उपभोग किया है जो एक साल पहले की तुलना में 9.4 फीसदी अधिक है। एफजीई ने 2018 में भारत के जेट ईंधन की मांग में सालाना आधार पर 10.5 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया है। वहीं, ऊर्जा सलाहकार ट्रिफेक्टा को 12-15 फीसदी वृद्धि होने की उम्मीद है। 
 
हवाई सफर तक पहुंच 
 
सरकार की एक अग्रणी योजना के तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) 2019-20 तक हवाई अड्ïडों के बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए 17500 करोड़ रुपये (2.7 अरब डॉलर) निवेश करने जा रहा है। लंदन की बीएमआई रिसर्च मेंं एक वरिष्ठï तेल एवं गैस विश्लेषक एम्मा रिचड्ïर्स ने कहा कि यात्री और सामान दोनों ही के लिए सरकार द्वारा संबंधित बुनियादी ढांचे में विस्तार और शहरों के बीच बेहतर होते हवाई संपर्क का लाभ मिलना चाहिए। हवाई मार्गों के लिए इस साल की शुरुआत में लगी बोली में एएआई ने छोटे शहरों को जोडऩे के लिए प्रत्येक हफ्ते 4,00,000 किलोमीटर से अधिक का ठेका दिया है, जिसे 'टीयर 2' गंतव्यों का नाम दिया है। शीर्ष भारतीय विमानन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन जो इंडिगो के नाम से परिचालन करती है और सबसे अधिक ठेके लिए हैं, ने कहा कि नए मार्गों में मध्य भारत में भोपाल से पश्चिम में नासिक तक उड़ान शामिल है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2018 में घरेलू हवाई ट्रैफिक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 22 फीसदी उछलकर 2.22 करोड़ यात्री हो गया। 
 
कम हो रहा निर्यात 
 
रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार ऑयल जैसी भारतीय रिफाइनरी जेट ईंधन सहित पेट्रोलियम उत्पादों की महत्त्वपूर्ण निर्यातक हैं। थॉमसन रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, भारत जेट ईंधन के शीर्ष तीन एशियाई निर्यातकों में से एक है। लेकिन घरेलू मांग बढऩे की वजह से निर्यात में कमी आ सकती है। बीएमआई में कार्यरत रिचड्ïर्स ने कहा, 'घरेलू मांग में वृद्धि की वजह से क्षेत्र के दूसरे बाजारों की आपूर्ति करने की क्षमता में निश्चित तौर पर कमी आएगी।' 
कीवर्ड ETF, jet, fuel,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक