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फसल को नुकसान, घटेगी आम की शान!

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 20, 2018 11:11 PM IST

इस साल आम के दाम ऊंचे रहने के आसार हैं। कारण कि प्रतिकूल मौसम से उत्पादन घटने के आसार हैं और सरकार आम निर्यात बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में पहले गर्मी, फिर ठंड और उसके बाद बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से इस साल आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। आम में बौर आने के खास समय जनवरी और फरवरी में मौसम अचानक गर्म हो गया। इसके बाद मौसम जल्द ठंडा पड़ गया और अब फिर गर्मी बढ़ गई है। आम की अगेती फसल तोड़े जाने से पहले उत्तर-पूर्वी राज्यों समेत प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है, जिससे बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान हुआ है। 

 

इस तरह फलों के राजा आम का स्वाद चखने के लिए एक साल से इंतजार कर रहे उपभोक्ताओं को ज्यादा दाम चुकाने होंगे। आम के सीजन की शुरुआत अल्फांसो किस्म के साथ हुई है। इसकी मॉडल कीमत शुरुआत में 18 रुपये प्रति किलो थी, जो एक समय बढ़कर 30 रुपये किलो पर पहुंच गई। हालांकि इसके दाम अप्रैल के दूसरे सप्ताह में गिरकर 14 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, लेकिन अब बढ़कर 20 रुपये पर पहुंच गए। हाजिर खुदरा बाजार में केसर 100 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जो पिछले साल से 30-40 फीसदी तक महंगा है। 

नीलकंठ ऑर्गेनिक मैंगो फार्म में साझेदार रवि वाघसिया ने कहा, 'इस साल प्रतिकूल मौसम से आम की फसल का रकबा 10 से 15 फीसदी कम हो गया है। बौर आने के मौसम में अचानक बदलाव और उसके बाद ओलावृष्टि से आम की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। हमारा अनुमान है कि इस सीजन में आम के दाम ऊंचे रहेंगे।' नीलकंठ ऑर्गेनिक एग्रो फार्म गुजरात की आम निर्यातक है, जो मुख्य रूप से कनाडा और स्विटजरलैंड को निर्यात करती है। 

हालांकि शुरुआती संकेतों के आधार पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने जनवरी 2018 में जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में कहा था कि इस सीजन में देश में आम का उत्पादन 5 फीसदी बढ़कर 207 लाख टन रहेगा, जो पिछले साल 195 लाख टन था। देश की सबसे बड़ी फल निर्यातक कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'कम उत्पादन के अनुमानों के आधार पर इस साल आम की आपूर्ति कम रहने के आसार हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को आम की कुछ निश्चित किस्मों की मांग पूरी करने में दिक्कतें आ सकती हैं।'

हालांकि अखिल भारतीय आम उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष डी के शर्मा का मानना है कि अगले दो महीनों के दौरान मौसम की स्थितियां आम के उत्पादन के लिए अहम होंगी। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने इस सीजन में आम का निर्यात बढ़ाने के लिए बड़ा प्रचार कार्यक्रम शुरू किया है। उसने परंपरागत बाजारों के अलावा चीन, कजाकस्तान, दक्षिण कोरिया और ईरान में भारत की बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान देने के लिए अधिकारी तैनात किए हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ को भी आम का निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत मुख्य रूप से दशहरी, बादामी, हापुस, सफेदा और तोतापरी का निर्यात करता है। 

 

एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'ईरान ने भारत से आम के आयात के लिए अपना बाजार पिछले साल खोला था। भारत ने ईरान को आम की कुछ मात्रा का निर्यात किया है। ईरान भारत से बहुत सी जिंसों का आयात करता है, इसलिए ईरान को आम निर्यात में बड़ी संभावनाएं नजर आ रही हैं। हम समुद्री रास्ते से ईरान को आम के निर्यात के बारे में विचार कर रहे हैं। हम ईरान के बाजार में पाकिस्तान की कुछ हिस्सेदारी हासिल कर लेंगे।' 
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