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जीएसटी का आघात, लुढ़का वस्त्र निर्यात

विनय उमरजी | अहमदाबाद Apr 22, 2018 09:41 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के पहले वर्ष में भारत के तैयार वस्त्र या सिलेसिलाए कपड़ों के निर्यात में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 18 में डॉलर के रूप में इसमें करीब चार प्रतिशत तक की कमी आई है। रुपये के रूप में तो इसमें 7.6 प्रतिशत के साथ ज्यादा गिरावट आई। वित्त वर्ष 17 में सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात 17.4 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 18 में 3.8 प्रतिशत गिरकर 16.71 अरब डॉलर पर आ गया। डॉलर के लिहाज से माह-दर माह गिरावट के कारण सिलेसिलाए वस्त्रों के निर्यात में गिरावट आई, जो अक्टूबर 2017 में 39.30 प्रतिशत की गिरावट से शुरू होकर मार्च 2018 में 17.8 प्रतिशत तक गई। अकेले मार्च में ही भारत का सिलेसिलाए वस्त्रों का निर्यात 1.49 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 1.81 अरब डॉलर था।

 
परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन एचकेएल मागू ने कहा कि निर्यात के आंकड़े बताते हैं कि वस्त्र निर्यात न सिर्फ शिथिल पड़ रहा है, बल्कि मंदी की तरफ जा रहा है। इससे उद्योग में कमी का साफ इशारा झलकता है जो चिंता का एक बड़ा कारण है। यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों के साथ प्रतिस्पर्धी देशों के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) जैसे वैश्विक कारक पहले ही सिलेसिलाए कपड़ों के निर्यातकों के सामने चुनौती पेश कर रहे थे। उद्योग का कहना है कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किए जाने से निर्यातकों का धन रुक गया। इसके अलावा शुल्क वापसी और राज्यों के शुल्कों (आरओएसएल) में रियायत जैसे निर्यात प्रोत्साहन कम कर दिए गए। मागू ने कहा कि जहां एक ओर शुल्क वापसी दर और आरओएसएल को क्रमश: 7.5 प्रतिशत और 3.9 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर जीएसटी के बाद भारत वाणिज्यिक निर्यात योजना (एमईआईएस) के तहत प्रोत्साहन को दो से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया गया। 
 
हालांकि, 30 जून को एमईआईएस की अंतिम समय सीमा होने से उद्योग ऊंचे प्रोत्साहन के आधाार पर इस तारीख से आगे ऑर्डर लेने के संबंध में अनिश्चित स्थिति में है। मागू ने कहा कि पकेक तौर पर नहीं कह सकते कि एमईआईएस आगे भी जारी रहेगी। अगर हम जून के बाद चार प्रतिशत का प्रोत्साहन मान लेते हैं और सरकार इसे नहीं बढ़ाती है, तो हमें धन की हानि होगी।  सिलेसिलाए वस्त्रों के भारतीय निर्यातकों को वैश्विक कारणों से प्रतिस्पर्धा में दिक्कत आ रही है। मागू ने कहा कि हालांकि चीन ने वस्त्र निर्यात की जगह खाली कर दी है, लेकिन भारत वियतनाम, बांग्लादेश या कंबोडिया की तरह इस मौके को भुना नहीं पा रहा है। इन देशों ने मुक्त व्यापार समझौते कर रखे हैं। वैश्विक वस्त्र बाजार में भारत महंगा पड़ रहा है।
 
यूरोपीय संघ के बाजार में अपनी शुल्क मुक्त पहुंच के दम पर बांग्लादेश ने चीन के बाद दूसरे सबसे बड़े वस्त्र निर्यातक के रूप में अपने दर्जे को बरकरार रखा हुआ है। अमेरिका के बाजार में अपनी वृद्धि बनाए रखते हुए वियतनाम ने बड़े वस्त्र निर्यातक देशों के बीच सबसे तेज बढ़त बना रखी है। मागू ने कहा कि बांग्लादेश और वियतनाम वस्त्र निर्यात में लगातार वृद्धि दिखा रहे हैं। हम चाहेंगे कि सरकार जल्द से जल्द इस मुद्दे पर ध्यान दे।
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