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ई-नाम परियोजना उद्देश्य में विफल!

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Apr 24, 2018 09:51 PM IST

केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ई-नाम को और अधिक राज्यों में विस्तारित करने पर विचार कर रही है लेकिन फिलहाल यह अपने उद्देश्यों पर खरा उतरता नहीं दिख रहा। इस बीच जिंस हाजिर और वायदा बाजारों को एकीकृत करने पर विचार करने के लिए गठित एक अधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति का कहना है कि कई मंडियों में भौतिक रूप से नीलामी पूरी करने के बाद आंकड़ों को ई-नाम में भरा जा रहा है। यह इस मंच के पारदर्शिता और उचित मूल्य निर्धारण के विचार का खुला उल्लंघन है। 
 
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा है कि ऐसी मंडियों में जिंसों की ऑनलाइन नीलामी हो ही नहीं रही है और ऑफलाइन नीलामी के बाद आंकड़ों को सिस्टम में डाला जा रहा है। समिति की स्थापना वित्त मंत्रालय ने एक वर्ष पहले की थी। इसने अपनी रिपोर्ट गत फरवरी में जमा की।  केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा इस रिपोर्ट पर विचार किया गया और अब यह सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध है। समिति ने कहा कि ई-नीलामी के इस प्लेटफॉर्म में खरीदार, विक्रेता के ब्योरे, उनके पते, जिंस का नाम मात्रा और नीलामी दर आदि सब बाद में भरा जा रहा है। इसके अलावा समिति ने यह भी पाया कि कई कृषि उपज बाजार समितियों के पास ऑनलाइन नीलामी के पहले जिंस की ग्रेडिंग और उसका उचित आकलन करने के लिए प्रयोगशाला तक नहीं है। 
 
रिपोर्ट में कहा गया है, 'हालांकि कुछ प्रयोगशालाओं में नमी मापक और वजन करने वाली मशीन जैसे मूलभूत उपकरण हैं लेकिन अधिकांश में इनकी कमी प्रमुख तौर पर देखी गई। इससे ऑनलाइन कारोबार प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग का मकसद प्रभावित हो रहा है।' एपीएमसी को भौतिक और रासायनिक दोनों तरह की गुणवत्ता आंकने के लिए मूलभूत उपकरणों से तो अवश्य सुसज्जित होना चाहिए। इसमें ऑटोमेटिक एनालाइजर भी शामिल है। इसके अलावा कुछ ही मंडी हैं जहां जिंसों की बड़े आकार की ई-नीलामी हो पा रही हो। 
 
समिति ने यह भी पाया कि एजीमार्केटनेट और ई-नाम में आवक के आंकड़ों में काफी अंतर मौजूद है। ऐसा इसलिए क्योंकि एजीमार्केटनेट डाटा वास्तविक लेनदेन को दर्ज करता है जबकि ई-नाम एपीएमसी के गेट पर हुई आवक के आंकड़े दर्ज करता है।  ई-नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की पसंदीदा योजनाओं में से एक है। इसके तहत 31 मार्च, 2018 तक देश के 585 बाजारों का एकीकृत करने की योजना बनाई गई। दिसंबर 2017 तक करीब 470 बाजारों को ई-नाम प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जा चुका है। अभी कुछ माह पहले तक करीब 1.66 करोड़ टन का कारोबार इन प्लेटफॉर्म हुआ जिसकी कीमत करीब 422.65 अरब रुपये रही। 
 
इस बीच समिति ने यह भी कहा कि ई-नाम को पूरी क्षमता से संचालित करने और उसके वांछित लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर ई-नाम या एपीएमसी में उचित भंडारण सुविधा हो ताकि विक्रेता किसानों को सस्ता भंडारण मिल सके। इससे उन्हें जल्दबाजी में उपज नहीं बेचनी होगी।  इसके अलावा खरीदार चाहे कहीं का भी हो उसे अपनी पसंद के बाजार में कारोबार की सुविधा होनी चाहिए। उसकी मदद के लिए विवाद निस्तारण आदि की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।  समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपज की नीलामी एक साझा इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर एक साथ सभी एपीएमसी में और निजी बाजारों में भी होनी चाहिए।
कीवर्ड E-naam, mandi,

  
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