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कृषि जिंसों में गिरावट का दौर

सुशील मिश्र | मुंबई Apr 24, 2018 09:51 PM IST

बेहतर फसल के बाद सामान्य मॉनसून के पूर्वानुमान, कमजोर मांग और कृषि जिंसों की अधिक आपूर्ति के साथ बाजार में धन के अभाव का सीधा असर कृषि जिंसों की कीमतों पर पड़ा रहा है। करीब सभी कृषि जिंसों के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है। सोयाबीन और सरसों में गिरावट गहरा गई है। चना न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे बिक रहा है। चीनी की मिठास भी गायब है। मसालों में गरमाहट नजर नहीं आ रही है। वैश्विक कीमतों में गिरावट के चलते घरेलू बाजार में दबाव बढ़ा है जिसके चलते आने वाले समय में कृषि जिंसों के दाम और भी पतले होंगे। 
 
बाजार में कृषि जिंसों का कारोबार लाल निशान पर हो रहा है। तिलहन, दलहन, मसाले, चीनी और कपास सहित सभी के दाम लुढ़क रहे हैं। वायदा और हाजिर बाजार में तिलहन में जोरदार गिरावट हुई। सोयाबीन दो महीने और सरसों तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गईं। कमजोर मांग की वजह से वैश्विक बाजार में सोयाबीन की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। घरेलू बाजार में महज दो दिन में सोयाबीन के दाम करीब ढाई फीसदी गिरकर 3,733 रुपये प्रति क्ंिवटल पहुंच गए, वायदा बाजार में भी सोयाबीन के दाम गिरकर 3,750 रुपये प्रति क्ंिवटल हो गए। बाजार में नई फसल आने के कारण सरसों के दाम गिरकर 3,920 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, वायदा बाजार में भी कीमतें लुढ़कर 3,863 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। बाजार जानकारों का कहना है कि अर्जेन्टीना और ब्राजील में बेहतर फसल के साथ अमेरिका और चीन में कमजोर मांग की वजह से सोयाबीन के दाम लुढ़क रहे हैं जबकि घरेलू बाजार में जोरदार आवकसे सरसों के दाम गिर रहे हैं।
 
बाजार में दलहन के भाव लगातार लुढ़क रहे हैं। किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे बेचने को मजबूर हो रहे हैं। चने के दाम गिरकर 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच चुके हैं। हाजिर बाजार में चना 3,300 रुपये से 3,550 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है जबकि सरकार ने चने का एमएसपी 4,400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। चना के साथ मैसूर और तुअर दालों के दाम भी लगातार गिर रहे हैं। इस साल अप्रैल से फरवरी (2017-18) के बीच 9.7 लाख टन चने का आयात किया गया जो पिछले साल हुए आयात से 4.6 फीसदी अधिक है। दलहन-तिलहन की तरह दूसरे कृषि जिसों के दामों में भी गिरावट हुई है। 
 
मसालों में चौतरफा गिरावट देखने को मिल रही है। महज दो दिन हाजिर बाजार में जीरा के दाम में करीब ढाई फीसदी लुढ़क गए। वायदा बाजार में जीरा टूट कर 15,710 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जबकि जीरे में लगातार बढ़त देखी जा रही थी। फरवरी में जीरे का निर्यात 30 फीसदी बढ़कर 9,512 टन पहुंच गया। अप्रैल महीने में जीरे की आपूर्ति कमजोर रही है अप्रैल में मंडियों में हीरे की आवक करीब 30 फीसदी कम है। जीरे में गिरावट की वजह मुनाफवसूली मानी जा रही है। वायदा बाजार में धनिया 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे पहुंच गया जबकि हल्दी करीब ढाई फीसदी फीकी होकर 7,000 के नीचे बिक रही है।  हल्दी के दाम गिरकर 6,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। चीनी का भाव 10 फीसदी गिरकर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है जबकि चीनी मिलों में दाम 2,500 रुपये पहुंच गए। वहीं कपास के भाव गिरकर 870 रुपये प्रति 20 किलोग्राम हो गए। 
कीवर्ड agri, farmer, jins,

  
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