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अरंडी के नए बीजों से उत्पादन दोगुना

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 26, 2018 10:02 PM IST

गुजरात में अरंडी बीजों पर किए गए एक नए प्रयोग से परंपरागत खेती के मुकाबले इसका उत्पादन दोगुना हो गया है। इसके लिए न तो खेती करने के तरीके में कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत पड़ी है और न ही अतिरिक्त खर्च की।  इस प्रयोग को छह जिलों में 160 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर किया गया। इसमें सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (एसडीएयू), पालनपुर द्वारा विकसित उच्च उपज की जीसीएच-7 किस्म का उपयोग किया गया। इस बीज से ज्यादातर जगहों पर औसतन चार टन प्रति हेक्टेयर की उपज दर्ज की गई है। परंपरागत कृषि में प्रति हेक्टेयर दो टन से अधिक उपज नहीं होती है।     
 
इस प्रयोग से पूरे गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान और इसकी खेती करने वाले दूसरे बड़े राज्यों के किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव होगा। सॉल्वेंट एक्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा, 'खेती हमारे दिशानिर्देश और लगातार देखरेख में की गई जिससे खेती करने के तरीके में बिना कोई बड़ा बदलाव किए या कोई अतिरिक्त खर्च के किसानों की आमदनी दोगुनी हुई।'  भारत अरंडी तेल और अरंडी खली की वैश्विक मांग के करीब 90 प्रतिशत की आपूर्ति करता है। विदेशों से मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अरंडी तेल का उपयोग फार्मास्यूटिकल्स और विमानन (एक ईंधन के तौर किया जाता है क्योंकि यह शून्य से 40 डिग्री नीचेतापमान पर भी नहीं जमता है) सहित विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। 
 
एसोसिएशन बीज की इसी किस्म और खेती करने के तरीके से इस साल गुजरात, तेलंगाना और राजस्थान में मॉडल कृषि क्षेत्र को बढ़ाकर 200 हेक्टेयर करने की योजना बना रही है। जीसीएच-7 किस्म विपरीत जलवायु स्थिति को झेलने में सक्षम है। कीटों का हमला एक दूसरी समस्या है और एसडीएयू ऐसे बीजों के विकास के लिए काम कर रहा है जो इनके प्रति भी प्रतिरोधक क्षमता वाला हो। एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, 'विश्व बाजार से अरंडी बीज के गौण उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है। एक ओर जहां विभिन्न औद्योगिक उद्देश्यों के लिए अरंडी तेल का उपयोग किया जाता है, वहीं खली का उपयोग बायो-उवर्रक के तौर पर होता है। भारत जापान और दूसरे देशों को 2,00,000 टन अरंडी खली का निर्यात करता है।
 
किसान बेहतर प्रतिफल के लिए अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, ऐसे में अरंडी उत्पादन से जुड़े ऐसे विकास का विशेष महत्त्व है। 23 लाख टन के वार्षिक रिकॉर्ड उत्पादन के बाद अरंडी बीज की कीमत गिरकर 2,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गई थी (गुजरात में फिलहाल थोक कीमत 4,075 रुपये प्रति क्विंटल है) जिसकी वजह से किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करने की योजना बना रहे हैं। 2016-17 में 14 लाख टन उत्पादन हुआ था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को 2017-18 में 15 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। अरंडी तेल के व्युत्पादों का उत्पादन करने वाले यहां के रॉयल कैस्टर प्रोडक्ट्ïस में संयुक्त प्रबंध निदेशक हर्ष व्यास उम्मीद करते हैं, 'अरंडी उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग की वजह से इसका उत्पादन दोगुना किए जाने पर भी इसकी कीमत प्रभावित नहीं होगी।'
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