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15 फीसदी बढ़ सकता है रकबा

रॉयटर्स | मुंबई Apr 27, 2018 08:49 PM IST

सरकार द्वारा खाद्य तेल पर आयात शुल्क को बढ़ाकर एक दशक से भी अधिक के उच्चतम स्तर पर किए जाने के बाद भारतीय किसान सोयाबीन के रकबे में लगभग 15 प्रतिशत तक का इजाफा कर सकते हैं। उद्योग के एक संगठन ने यह संभावना जताई है। शुल्क वृद्धि से घरेलू तिलहन के दाम करीब दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। ग्रीष्म काल में बोई जाने वाली इस मुख्य तिलहन का अधिक उत्पादन दुनिया के सबसे बड़े वनस्पति तेल आयातक भारत के लिए मददगार हो सकता है। इससे ब्राजील, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया और मलेशिया से किए जाने वाले महंगे आयात में कटौती आ सकती है। यह जापान, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे एशियाई खरीदारों को किए जाने वाले प्रमुख पशुआहार सोयामील के निर्यात में इजाफे का जरिया भी हो सकता है।
 
उद्योग की संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने एक साक्षात्कार में रॉयटर्स से कहा कि सोयाबीन से किसानों को अच्छा प्रतिफल मिल रहा है। शुल्क वृद्धि के कारण सोयाबीन की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी अधिक हैं। इस वर्ष रोपाई के क्षेत्र में 15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। एक समय में भारतीय सोयामील का योगदान पूरे दक्षिणपूर्व एशियाई के आयात का लगभग एक-चौथाई हुआ करता था, लेकिन स्थिर उत्पादन के बीच घरेलू सोयाबीन की खपत बढऩे की वजह से देश की यह हिस्सेदारी गिरती जा रही है।
 
स्थानीय तिलहन किसानों की सहायता और खाद्य तेल के बढ़ते आयात को रोकने के लिए भारत ने ताड़ के तेल, सोया तेल और खाना पकाने के अन्य तेलों पर आयात शुल्क को बढ़ाकर एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर कर दिया है।इस इजाफे के बाद स्थानीय सोयाबीन के दाम महीने की शुरुआत में उछलकर 3,895 रुपये (58.31 डॉलर) प्रति 100 किलोग्राम हो गए, जो तकरीबन दो वर्षों का उच्चतम स्तर है। सोयाबीन का सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 3,050 रुपये है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2017 में 1.06 करोड़ हेक्टेयर में 
 
सोयाबीन की खेती की गई थी, जो पिछले साल की तुलना में आठ प्रतिशत कम रही। मुंबई स्थित वनस्पति तेल आयातक सनविन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी संदीप बाजोरिया ने कहा कि मध्य भारत में किसानों को दालों से अच्छा प्रतिफल नहीं मिल रहा है और इस कारण उनमें से कुछ किसान सोयाबीन का रुख कर लेंगे। उन्होंने कहा कि चने जैसी ग्रीष्म काल में बोई जाने वाली दलहन के दाम उच्च आपूर्ति के कारण सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से नीचे चल रहे हैं। ज्यादातर भारतीय किसान मॉनसूनी बारिश शुरू होने के बाद जून में सोयाबीन, कपास और दलहन की बुआई शुरू करते हैं, जो वर्षा पर आधारित होती है। देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का योगदान 80 प्रतिशत से अधिक होता है।
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