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रत्नाभूषण निर्यात में वृद्धि के आसार

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 27, 2018 08:50 PM IST

वित्त वर्ष 18 में पांच प्रतिशत की गिरावट आने के बाद जौहरियों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत के रत्नाभूषण निर्यात में 10 प्रतिशत की उछाल आएगी। वे इसका कारण नए बाजारों की मांग, डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और हीरों के दामों में बढ़ोतरी को मानते हैं। भारत का 41 अरब डॉलर का रत्नाभूषण निर्यात उद्योग लैटिन अमेरिका, दक्षिणपूर्व एशिया और कम्बोडिया में अवसर तलाश रहा है। साथ ही, फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में यूरोपीय संघ के निर्यात खंड में तीव्र वृद्धि ने भी उम्मीद बढ़ाई है। इसके अलावा अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात आदि पारंपरिक बाजारों की मांग में वित्त वर्ष 18 के अंत में सुधार नजर आया है।
 
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के उपाध्यक्ष कोलिन शाह ने कहा कि हमने तराशने और चमकाने में इजाफा हासिल किया है और हमने भारत के नेतृत्व को साबित कर दिया है। इजाफे का अगला दौर हीरे के दामों में वृद्धि से आएगा। इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार से भी अच्छा संकेत मिल रहा है जिसका अर्थ है उपभोक्ताओं के पास अधिक व्यय करने वाली आय। भारत के कुल रत्नाभूषण निर्यात में करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका का होता है। पिछले 10 सालों के दौरान हीरे के दामों में करीब 3.5 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से इजाफा हुआ है। शाह कहते हैं कि रुपये में हाल ही में लगभग दो प्रतिशत तक की गिरावट आई है। नए बाजारों से भी ऑर्डर मिलेंगे। 2016-17 में रत्नाभूषण निर्यात 43.2 अरब डॉलर (2,892 अरब रुपये) था जो 2017-18 में कुछ गिरकर 41 अरब डॉलर (2,641 अरब रुपये) हो गया।
 
इस क्षेत्र में वृद्धि मुख्य रूप से तराशे और परिष्कृत हीरा (सीपीडी) खंड में हुई जो वित्त वर्ष 18 में 4.2 प्रतिशत बढ़कर 23.7 अरब डॉलर हो गई। इस खंड में कुल मात्रा 3.486 करोड़ कैरट रही, जबकि वित्त वर्ष 17 में यह 3.221 करोड़ कैरट थी। सोने के आभूषणों का निर्यात 10.9 प्रतिशत बढ़कर 97 लाख अरब डॉलर हो गए। जीजेईपीसी के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि हालांकि, भारत परिष्कृत हीरों में निर्विवाद रूप से अग्रणी है, वैश्विक रूप में 15 में से 14 कच्चे हीरों का प्रसंस्करण यहां हो रहा है, लेकिन देश को दुबई, हॉन्गकॉन्ग, तुर्की और अन्य केंद्रों से सोने के आभूषणों में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, वित्त वर्ष 19 में हमारे सोने के आभूषणों की निर्यात वृद्धि इसी गति से जारी रहेगी।
 
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को किए जानेे वाले हमारे रत्नाभूषण निर्यात पर वहां सरकार द्वारा लगाए गए पांच प्रतिशत के मूल्य वर्धित कर से धक्का पहुंचा था, जो 1 जनवरी से प्रभावी हुआ। वित्त वर्ष 18 में भारत के कुल रत्नाभूषण निर्यात में यूएई की हिस्सेदारी गिरकर 25 प्रतिशत पर आ गई, जबकि पिछले साल यह 32 प्रतिशत थी। शाह ने कहा कि भारत का निर्यात कारोबार यूएई से हॉन्गकॉन्ग की ओर स्थानांतरित हो रहा है जिसका अधिकतर भाग अन्य गंतव्यों को भेज (निर्यात) दिया जाता है। नीरव मोदी-मेहुल चोकसी, पंजाब नैशनल बैंक घोटाले के मद्देनजर जीजेईपीसी का कहना है कि वह 2,500 निर्यातकों सहित अपने 6,000 सदस्यों से 'नो योर कस्टमर' नियम का क्रियान्वयन कड़ा करने का प्रयास कर रही है।
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