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दूध कीमतें गिरने से महाराष्ट्र के डेयरी किसान करेंगे विरोध-प्रदर्शन

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 29, 2018 09:55 PM IST

एक वर्ष पहले दूध की लाभकारी कीमत की मांग को लेकर महाराष्ट्र के किसानों ने हजारों लीटर दूध सड़क पर बिखेर दिया था। इस बार फिर से इन्हीं मांगों के चलते यहां के किसान मई की शुरुआत में एक सप्ताह मुफ्त में दूध बांटने की योजना बना रहे हैं। पिछले वर्ष किसानों ने राज्य सरकार से निजी डेयरी तथा सहकारी इकाइयों द्वारा दूध खरीद की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर निर्धारित करने की मांग की थी। सरकार ने इस विरोध को कोई तवज्जो नहीं दी। पशुओं की कीमतें और श्रम तथा परिवहन लागत में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि ऐसे में 24-25.5 रुपये प्रति लीटर की दर पर दूध बेचने से इस वर्ष कुल प्राप्ति में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। 
 
नासिक के बालासाहेब बहावूडकर कहते हैं, 'एक लीटर दूध की उत्पादन लागत 32-35 रुपये आ रही है। किसानों के जीवन-यापन के लिए आवश्यक है कि दूध की कीमतें 50 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की जाएं।' यहां के डेयरी किसान अब कोल्हापुर, पुणे, सातारा और दूसरे क्षेत्रों के किसानों के साथ मिलकर मंच साझा कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में गाय के दूध की औसत कीमत 19-24 रुपये प्रति लीटर है।  गोवर्धन ब्रांड से दूध और संबंधित उत्पाद विक्रेता पराग मिल्क फूड्स लि. के अध्यक्ष देवेंद्र शाह कहते हैं, 'किसानों को अभी एक लीटर दूध के लिए 22 रुपये मिल रहे हैं जो पर्याप्त नहीं है। हालांकि गर्मी के मौसम के कारण कुछ समय बाद दूध आपूर्ति में कमी आएगी और जून माह से कीमतें थोड़ी बढ़ेंगी। ऐसे में गाय के दूध की कीमतों में 2-3 रुपये प्रति लीटर की तेजी आएगी। बाधारहित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। दूध की कीमतें कम होना किसानों सहित ग्राहकों और डेयरी फर्म, किसी के लिए भी सही नही है। इससे दीर्घावधि में दूध आपूर्ति में कमी आएगी।'
 
महाराष्ट्र में दूध की कीमतें मुख्यत: देश और विदेश में स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमत पर निर्भर करती है। वर्तमान में एसएमपी की कीमत 120-125 रुपये प्रतिकिलो है, जबकि इसकी लागत 220-225 रुपये किलो आ रही है। इस कारण डेयरी कंपनियों को होने वाला मार्जिन कम हो गया है।  पुणे स्थित सागर डेयरी फर्म के सहयोगी उमेश परयानी कहते हैं, 'डेयरी कंपनियां हर गांव में दूध संग्रहण वाहन भेजती हैं। इसके बाद वे इसे चिलिंग प्लांट भेज देती हैं जो हर 2 किलोमीटर पर बनाया गया है। किसानों को अधिक कीमत देने से डेयरी कंपनियों के मार्जिन पर काफी असर पड़ेगा।'
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