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सेबी को हाजिर जिंस एक्सचेंजों का नियामक बनाने का प्रस्ताव

राजेश भयानी | मुंबई Apr 29, 2018 09:56 PM IST

अगर एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया गया तो सोने, धातुओं और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा उत्पादों के लिए हाजिर कमोडिटी एक्सचेंज शुरू हो सकते हैं। इन एक्सचेंजों का नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) होगा।  नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद के मार्गदर्शन में वित्त मंत्रालय द्वारा नियुक्त समिति ने यह भी सुझाव दिया है, 'जिंसों के लिए स्पॉट एक्सचेंज के निर्माण के लिए कुछ हद तक कमोडिटी एक्सचेंजों के मौजूदा संस्थागत ढांचे का इस्तेमाल किया जा सकता है।' इसका मतलब यह हो सकता है कि मौजूदा एक्सचेंज अन्य स्पॉट एक्सचेंजों में विस्तार में दिलचस्पी दिखाएंगे।
 
स्पॉट कमोडिटी एक्सचेंजों के लिए नियमन पिछले कुछ वर्षों, खासकर 2013 में नैशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) घटनाक्रम के बाद से विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। एनएसईएल में तब 5600 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। वर्ष 2016 से ही बंबई स्टॉक एक्सचेंज और इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने राष्टï्रीय ऑनलाइन स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज के गठन की मांग करते रहे हैं और बाद में कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंजों ने सोने, धातु और ऊर्जा उत्पादों के लिए स्पॉट एक्सचेंज का प्रस्ताव रखा।
 
'जिंस हाजिर एवं डेरिवेटिव बाजार के समेकन' के लिए उपाय सुझाने के लिए नियुक्त समिति ने फरवरी में वित्त मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। आर्थिक मामलों के विभाग ने इस पर विचार-विमर्श किया और इसे सैद्घांतिक रूप से स्वीकृति दी। हालांकि इसका क्रियान्वयन विभिन्न मंत्रालयों और विभागों पर निर्भर है। समिति ने कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों पर चर्चा की है। दो साल पहले भी समग्र स्वर्ण नीति पर वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में एक स्थायी समिति ने यह प्रस्ताव रखा था कि सेबी को गोल्ड स्पॉट एक्सचेंजों को विनियमित करना चाहिए। हालांकि अब यह मामला तेज हो गया है क्योंकि कई जिंसों के लिए ऐसे एक्सचेंज के गठन की योजना बनाई गई है।
 
हालांकि सेबी स्पॉट कमोडिटी एक्सचेंजों की कमान संभालने को लेकर अनिच्छुक रहा है। सेबी इस समिति को पहले ही अपने इस रुख से अवगत करा चुका है कि कमोडिटी स्पॉट बाजार नियामकीय समीक्षा के दायरे में नहीं आते हैं और जिंसों के हाजिर बाजार के प्रबंधन के लिए उसके पास पर्याप्त कौशल और संसाधन नहीं हैं।  बाजार नियामक सेबी स्पॉट एक्सचेंजों के नियंत्रण के अधिकार दिए जाने के समिति सदस्यों के सुझाव पर असंतोष पहले ही जता चुका है। सेबी ने यह भी सुझाव दिया है कि कमोडिटी स्पॉट एक्सचेंजों के विनियमन का जिम्मा एक अलग क्षेत्रीय नियामक को दिया जाना चाहिए। 
 
नीति आयोग के सदस्य (कृषि) एवं समिति के चेयरमैन रमेश चंद ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'सेबी पूरे भारत में इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट कमोडिटी एक्सचेंजों को नियंत्रित करने के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यह अटैंडेंट रिस्क मैनेजमेंट, क्लीयरिंग और सेटलमेंट आदि से जुड़ा हुआ है। जिंसों के लिए स्पॉट एक्सचेंज के निर्माण के लिए काफी हद तक कमोडिटी एक्सचेंजों के मौजूदा संस्थागत ढांचे का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।' शुरू में सेबी ने अपने दायरे में जिंस डेरिवेटिव नियमों को लाए जाने का विरोध किया था, लेकिन बाद में सेबी इनके लिए नियामक बन गया और यह मौजूदा समय में इस बाजार (डेरिवेटिव) का विस्तार कर रहा है। 
 
मौजूदा समय में, कृषि जिंसों के लिए एनसीडीईएक्स ईमार्केट्ïस (एनईएमएल) और बेस मेटल (मुख्य रूप से इस्पात) के लिए एम-जंक्शन जैसे कमोडिटी क्षेत्र में ई-नीलामी प्लेटफॉर्म मौजूद हैं।  चंद ने यह भी कहा कि नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ईएनएएम) पर ध्यान केंद्रित किए जाने की जरूरत महसूस की गई थी, लेकिन इसे सेबी के दायरे से अलग रखा जाएगा।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, 'मॉडल एग्रीकल्चरल प्रोड्ïयूस ऐंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग (प्रमोशन ऐंड फैसिलिटेशन) ऐक्ट, 2017 से अधिसूचित कृषि जिंसों (पशुधन शामिल) के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्मों की स्थापना को बढ़ावा मिला है। इस वजह से समेकित इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट बाजार के विकास की संभावना मजबूत हुई है।' 
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