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केंद्र के फैसले से नाराज जूट उद्योग

जयजित दास | भुवनेश्वर Apr 29, 2018 09:57 PM IST

जूट उद्योग केंद्र सरकार के प्लास्टिक बोरी खरीद निर्णय से काफी नाराज है। उपभोक्ता मंत्रालय के खाद्य एवं जन वितरण विभाग नेप्लास्टिक बोरी की 2,50,000 गांठें (एक गांठ में 180 किलोग्राम) खरीदने का निर्णय लिया है।   2018-19 के रबी विपणन सत्र (आरएमएस) में खाद्यान्न की पैकिंग के लिए 16.9 लाख गांठों की जरूरत का अनुमान है। इसमें से जूट की बोरियों के लिए 2,50,000 गांठों की कमी बताई गई है। उद्योग से चर्चाओं के बाद और जूट आयुक्त द्वारा की गई सिफारिशों की मजबूती को देखते हुए कपड़ा मंत्रालय ने 2,50,000 गांठों के लिए उच्च घनत्व की पॉलिएथिलीन (एचडीपीई) और पॉलिप्रोपिलीन (पीपी) बोरियों की मंजूरी दी थी।  

 
हालांकि, जूट उद्योग ने आरोप लगाया है कि  उद्योग की क्षमता को नजरअंदाज कर एक बनाबटी कमी बनाई गई। जूट उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'खाद्य मंत्रालय द्वारा कृत्रिम (पीपी/एचडीपीई) आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनचाहे मौके बनाए जाने के बावजूद वे ऑर्डर पूर करने में नाकाम रहे। वे पंजाब से थोड़ी मात्रा (23,000 गांठों के लिए ऑर्डर) का ही प्रबंध करने में सफल रहे। हालांकि उन्होंने एक भी गांठ की आपूर्ति नहीं की।' माना जा रहा है कि मंत्रालय ने प्लास्टिक बोरी की आपूर्ति के लिए आरएमएस वितरण की तारीख मार्च से बढ़ाकर कुछ महीने आगे कर दी है और वह पहले ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से कृत्रिम बोरियों की आपूर्ति के लिए निविदा मई 2018 में लाने का आग्रह कर चुका है। 
 
सूत्र ने बताया, 'सरकार के इस कदम से जूट उद्योग बरबाद हो जाएगा क्योंकि इसके पास मई में आपूर्ति के लिए कोई ऑर्डर नहीं है और उसकी पूरी क्षमता बेकार पड़ी है। जबकि उद्योग सरकार की सभी जरूरत को पूरा करने में सक्षम है।'   उद्योग की शीर्ष निकाय इंडियन जूट मिल एसोसिएशन (आईजेएमए) ने इस पक्षपातपूर्ण रवैये का विरोध करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय का दरबाजा खटखटाया है और प्लास्टिक बोरियों की खरीद के निर्णय को वापस लेने की मांग की है।  आईजेएमए चेयरमैन मनीष पोद्दार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है, '17 अप्रैल, 2018 को हुई आरएमएस 2018-19 के लिए खाद्य समीक्षा बैठक और केएमएस (खरीफ विपणन सत्र) 2018-19 के लिए अग्रिम योजना बैठक में जब हमें पता चला कि खाद्य विभाग मई 2018 में 2,50,000 गांठों की खरीद में कमी करने के लिए अनुमति लेने की प्रकिया शुरू करेगी तो इसे लेकर हमें गहरा आश्चर्य हुआ। ऐसे समय में जब जूट उद्योग के हाथ में कोई ऑर्डर नहीं है यदि मई 2018 में खाद्य विभाग को एचडीपीई/पीपी बोरियों की खरीद की अनुमति का उपयोग करने दिया जाता है तो यह जूट उद्योग की अर्थव्यवस्था के लिए अनर्थकारी कदम होगा और कई मिलों के बंद होने की नौबत आ जाएगी।'
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