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उत्पादन कटौती करेगा बिनौला उद्योग

दिलीप कुमार झा | मुंबई Apr 30, 2018 10:14 PM IST

बढ़ती लागत और घटती बिक्री के चलते कॉटन सीड कंपनियों की योजना अगले खरीफ सत्र में उत्पादन में कमी करने की है। देश में करीब 1.22 करोड़ हेक्टेयर इलाके में 80 लाख किसान कपास की खेती करते हैं इनके लिए 450 ग्राम वजन के 5 करोड़ कॉटन सीड पैकेट तैयार किए जाते हैं।  कपास के बीजों का उत्पादन करने वालों का कहना है कि उत्पादन लागत पिछले तीन साल में 20 गुना बढ़ गई है। ऐसा तब हुआ जब जीन संवद्र्घित बीटी बॉलगार्ड-2 बीजों की कीमत 800 रुपये प्रति पैकेट तय कर दी गई। दो वर्ष बाद चालू वर्ष में केंद्र सरकार ने इस कीमत में 60 रुपये अथवा 7.5 फीसदी की कटौती कर इसके 740 रुपये कर दिया। 
 
कटौती की घोषणा ऐसे वक्त पर की गई जबकि बीज कंपनियों का कहना है कि उन्होंने किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं ताकि वे उसी रकबे में बेहतर फसल हासिल कर सकें। गत वर्ष महाराष्टï्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पिंक बॉलवर्म के प्रकोप के कारण उत्पादन में काफी कमी देखने को मिली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्पादन में कमी ने सरकार को वर्ष 2016-17 के लिए कपास उत्पादन से जुड़े अनुमान 5 से 7 फीसदी  कम करने पर मजबूर किया। नाथ सीड्स के प्रबंध निदेशक और भारतीय राष्टï्रीय बीज महासंघ के संस्थापक प्रमुख सतीश कागलीवाल ने कहा, 'हमने सरकार से यह अनुरोध किया था कि वह दो वर्ष के ठहराव के बाद बीज कीमतों में इजाफा करे ताकि बढ़ी हुई श्रम की लागत, तयशुदा तथा अन्य व्यय, शोध एवं विकास आदि का समायोजन इसमें हो सके। लेकिन सरकार ने इसके बजाय कीमत में 7.5 फीसदी की कमी कर दी। 
 
इसका असर अगले सीजन में कम उत्पादन और निवेश क्षमता पर नजर आएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मौजूदा सत्र में बीज पैकेट का वितरण लगभग समाप्त हो गया है।' उन्होंने कहा कि अगले सत्र में बीज के उत्पादन पर व्यापक असर देखने को मिलेगा।  बीज निर्माता कंपनियां अग्रिम तौर पर उत्पादन और वितरण नीति तैयार करने में जुटी हुई हैं। ये पैकेट आगामी मार्च के पहले पखवाड़े पंजाब और हरियाणा के बाजार में पहुंचने होंगे ताकि किसान थोड़ा पहले बुआई कर सकें। इन राज्यों में कपास की बुवाई प्राय: मॉनसून पूर्व की बारिश के साथ होती है। यही वजह है कि चालू वर्ष का बीज वितरण समाप्त हो चुका है। 
 
दो दशक पहले तक भारत कपास उत्पादन में निहायत कमजोर था। अब यह देश का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है। देश में 3.3 करोड़ से 3.8 करोड़ गांठ का सालाना उत्पादन होता है। एक गांठ का वजन करीब 170 किलो होता है। वहीं देश से हर साल 40 से 50 लाख गांठों का निर्यात किया जाता है। हमारे देश से चीन, बांग्लादेश और कई अन्य कपड़ा निर्यातक देशों को कपास निर्यात किया जाता है।  कपास का धागा चीन और बांग्लादेश को निर्यात किया जाता है। भारतीय बीज उद्योग फेडरेशन के कार्यकारी निदेशक अश्विनी यादव कहते हैं कि कीमतों में ऐसी कटौती के साथ कॉटन सीड उत्पादन को सफल कारोबारी मॉडल बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। 
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