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मार्च तिमाही में सोने का आयात 32 फीसदी घटा

राजेश भयानी | मुंबई May 01, 2018 09:39 PM IST

चालू कैलेंडर वर्ष 2018 की मार्च तिमाही में सोने के आधिकारिक आयात में 32 की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है। कारोबारियों का कहना है कि आभूषणों की कम मांग के कारण सोने का आयात कम रहा। उनका कहना है कि अप्रैल में अक्षय तृतीया और वैवाहिक मांग के बावजूद आभूषणों की मांग कम रही।  थॉमसन रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक देश में 2018 की जनवरी-मार्च तिमाही में 163.1 टन सोने का आयात हुआ। यह 2017 की इसी तिमाही के मुकाबले 32 फीसदी कम है। कुल आधिकारिक आयात में अपरिष्कृत सोने का हिस्सा 35 फीसदी रहा। 
 
जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स में वरिष्ठ विश्लेषक सुधीश नांबियथ ने ने कहा, 'यह गिरावट उस बाजार का एक संकेत था, जिसमें पर्याप्त स्टॉक था और अनाधिकारिक आयात की भारी आवक थी। इससे आपूर्ति पर्याप्त बनी रही।' वित्त वर्ष 2018 में भारत ने 830.6 टन सोने का आयात किया।  लोगों के हाथ में नकदी नोटबंदी के पहले के स्तरों के बराबर हो गई है, जिससे नकद कारोबार फिर से बढ़ा है। निवेश मांग 29 फीसदी बढ़कर 38 टन रही है। आगे सोने की कीमतें ऊंची होने की उम्मीद में नकद बाजार में अच्छी मांग आ रही है। जीएफएमएस रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही के दौरान आयात में गिरावट की मुख्य वजह कमजोर उपभोक्ता मांग रही। इस तिमाही में खरीद विशेष मौकों पर ही हुई और मनमाने तरीके से खर्च में गिरावट आई है। ग्रामीण मांग से भी बाजार को सहारा नहीं मिला क्योंकि फसलों की अत्यधिक आपूर्ति के कारण उनके दाम निचले स्तरों पर हैं। जीएसटी के बोझ और सोने के ऊंचे दामों की वजह से पुराने गहनों के बदले नए गहने खरीदने का रुझान बढ़ा है। इसका प्लेन आभूषण बाजार में कम से कम 45 से 50 फीसदी हिस्सा रहा। जीएफएमएस ने कहा है कि इस वजह से पहली तिमाही में सोने के आभूषणों की मांग पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले संतुलित रही। 
 
पिछली कई तिमाहियों से अपरिष्कृत (डोर) सोने का आयात बढ़ रहा है। मार्च तिमाही में भारत की 20 डोर गोल्ड रिफाइनरी ने सीधे आयात किया। भारतीय मानक ब्यूरो सभी डोर गोल्ड रिफाइनरी के लिए जून, 2016 से उसके पास पंजीकरण कराना और उसके मानदंडों का पालन करना अनिवार्य बना रहा है, इसलिए कुल आयात में अपरिष्कृत सोने का हिस्सा अधिक रहने के आसार हैं। जून, 2018 के बाद जो रिफाइनरी बीआईएस के पास पंजीकृत नहीं होंगी, उन्हें आयात करने का लाइसेंस नहीं मिलेगा। 
 
अपरिष्कृत सोने पर सीमा शुल्क  
 
इस बीच बाजार को यह इंतजार है कि बहुचर्चित स्वर्ण नीति कैसी आती है और विनियमित जमा प्रतिबंध अधिनियम को कैसे और कब लागू किया जाता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट पेश करते हुए घोषणा की थी कि सरकार एक स्वर्ण नीति तैयार कर रही है, जिसके दायरे में खदान से लेकर बाजार तक होंगे। एक अन्य मसला यह है कि बहुत से खुदरा विक्रेता ग्राहकों से जमाएं स्वीकार करने पर रोक लगाए जाने को लेकर चिंतित हैं। सराफ ग्राहकों से 11 महीनों के लिए मासिक निश्चित राशि जमा के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। ग्राहक यह राशि 11 महीने बाद गहने खरीदने के लिए जमा करते हैं, जिसके लिए सराफ कुछ प्रोत्साहन भी देते हैं। सराफों के लिए यह नकदी आवक का एक बड़ा स्रोत है। सराफ इस पैसे को अग्रिम बिक्री के रूप में प्राप्त पैसे के रूप में दिखाते हैं। हालांकि अब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विनियमित जमाओं पर रोक लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है और सराफों द्वारा स्वीकार की जाने वाली जमाएं इसके दायरे में आएंगी। इसके दूरगामी असर पडऩे की संभावना है। कुछ खुदरा विक्रेताओं को अपनी नकदी आवक के मॉडल को बदलना पड़ेगा।
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