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कपास कीमतों में नरमी से बढ़ेगी सोयाबीन बुआई!

दिलीप कुमार झा | मुंबई May 01, 2018 09:39 PM IST

आगामी खरीफ सीजन में कई किसान कपास की जगह सोयाबीन की बुआई करने की योजना बना रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि पिछले वर्ष सोयाबीन से बेहतर लाभ मिला। 2017-18 के कपास सत्र (1 जुलाई से 30 जून) के दौरान कपास की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव दिखा और अधिकतर समय इसकी कीमत सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम ही रहीं। केवल आपूर्ति सत्र के दौरान कीमतें एमएसपी (4,020 रुपये क्विंटल) से अधिक हुईं और गुजरात स्पॉट मार्केट में यह 4,320 रुपये क्विंटल तक पहुंची। इसका प्रमुख कारण भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा भारी मात्रा में कपास की खरीद करना था। 
 
इसके इतर, सोयाबीन की कीमतें सरकार द्वारा निर्धारित 2,850 रुपये क्विंटल के खरीद मूल्य से 25 प्रतिशत ज्यादा बनी हुई हैं। सरकार ने हाल ही में तिलहन और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ाने के उद्देश्य से खाद्य तेल पर आयात शुल्क लगा दिया है। फॉच्र्यून ब्रांड खाद्य तेल बनाने वाली अडानी विल्मर के मुख्य कार्याधिकारी अतुल चतुर्वेदी कहते हैं, 'हमें लगता है कि बेहतर दाम की उम्मीद में कम से कम 15 प्रतिशत किसान आगामी खरीफ सत्र में कपास के स्थान पर सोयाबीन की खेती करेंगे।'
 
पिछला वर्ष कपास किसानों के लिए काफी खराब रहा। विशेषकर महाराष्ट्र में पिंक वॉलवर्म के प्रकोप ने खड़ी फसल को बहुत नुकसान पहुंचाया। अकेले महाराष्ट्र के कुल 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर लगी कपास की फसल का एक तिहाई हिस्सा इससे प्रभावित हुआ। इसके बावजूद कपास सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक के अनुसार 2017-18 में भारत की कुल कपास आपूर्ति 4.418 करोड़ गांठें रही, जो इसके 4.01 करोड़ गांठों के अनुमान से 4 लाख अधिक है। गौरतलब है कि 1 गांठ 170 किलो की होती है। 
 
कपास निर्यात और कारोबार करने वाली कंपनी श्री राधालक्ष्मी कॉटन के प्रवक्ता अतुल गनात्रा ने कहा, 'महाराष्ट्र के साथ ही तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कपास किसान बेहतर लाभ वाली फसल की ओर देख रहे हैं। इस खरीफ सत्र में कपास के मुकाबले सोयाबीन में कम से कम प्रति एकड़ 12-15 प्रतिशत का लाभ मिल सकता है।' पिछले माह बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान से कपास की मांग मे तेजी आने से कपास की कीमतें बढ़ीं और अभी 4,700-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बनी हुई हैं। हालांकि अधिकांश किसान पहले ही पूरी फसल बेच चुके हैं और इस तेजी से उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। इससे पहले, कीमतों में अधिक गिरावट के चलते सीसीआई ने इस साल रिकॉर्ड 12 लाख कपास की गांठें खरीदीं, जबकि पिछले वर्ष केवल 1.5 लाख गांठें ही खरीदी थीं। 
 
गुजरात मंडी में सोयाबीन की कीमतें 3,738 रुपये क्विंटल बनी हुई हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित 3,050 रुपये क्विंटल के निर्धारित एमएसपी से लगभग 23 प्रतिशत अधिक हैं। मार्च में केंद्र सरकार ने कच्चे पाल तेल (सीपीओ) पर आयात शुल्क 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 44 प्रतिशत कर दिया था। वहीं, रिफाइंड तेल पर भी आयात शुल्क 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 54 प्रतिशत किया था। इस तरह पिछले 7 माह में 3 बार आयात शुल्क बढ़ाने से इन पर लगने वाले आयात शुल्क में कुल बढ़ोतरी लगभग 6 गुना हो गई है। अगस्त 2017 में पहली बार आयात शुल्क बढ़ाने से पहले सीपीओ और आरबीडी पामोलीन पर आयात शुल्क क्रमश: 7.5 प्रतिशत और 15 प्रतिशत था। साथ ही, बेसिक आयात कर पर 10 प्रतिशत का सोशल वेलफेयर सेस भी लगाया गया है। हालांकि, खाद्य तेल पर लगने वाला आयात शुल्क अभी उद्योग की मांग से काफी कम है और वे सीपीओ पर 70 प्रतिशत तथा आरबीडी पामोलीन पर 55 प्रतिशत आयात शुल्क के साथ ही 15 प्रतिशत के अधिभार की मांग कर रहे हैं। 
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