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अवैध जमा योजनाओं पर रोक से सोने की बिक्री 25 फीसदी घटेगी

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई May 01, 2018 09:40 PM IST

सरकार द्वारा प्रस्तावित नए अवैध जमा रोक योजना विधेयक, 2018 से सराफों का 25 प्रतिशत व्यवसाय प्रभावित होगा और इससे इस कारोबार में एकीकरण तेज होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में विधेयक पेश करने के लिए फरवरी में अपनी मंजूरी प्रदान की थी। इसका मकसद भारत में अवैध जमा गतिविधियों को नियंत्रित करना है। इस विधेयक से गैर-कानूनी तरीके से जमा स्वीकार करने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी।  कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कई आभूषण कारोबारी हर महीने रुपये में जमा स्वीकार कर रहे हैं और यह अवधि 11 महीने है। कुछ सराफ प्रतिफल चुकाने के तौर पर 12 महीने की किस्त के तौर पर ये जमाएं स्वीकार करते हैं या कुछ कारोबारी जमाकर्ताओं से 11वीं किस्त के अंत में आभूषण की बिक्री के वक्त मेकिंग चार्ज और वेस्टेज चार्ज नहीं लेते हैं। सराफे इन जमाओं को बिक्री के लिए अग्रिम के तौर पर दिखा रहे थे। हालांकि ऐसी जमाओं के नियंत्रण के लिए कोई एजेंसी या संस्था मौजूद नहीं है। 

 
प्रस्तावित बिल अवैध जमा योजनाओं से निपटने के लिए समग्र कानून प्रदान करता है, जिसमें अवैध तौर पर जमा स्वीकार करने वाली गतिविधि पर पूरी तरह प्रतिबंध की व्यवस्था है। इस कानून का परिणाम यह होगा कि गहनों के खुदरा कारोबारियों को संबद्घ योजनाओं को समय-सीमा तक (जब से कानून प्रभावी होगा) बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। लेकिन बिक्री की मात्रा ऐसे मामले में काफी अधिक है और सराफों द्वारा कुल स्वर्ण बिक्री में कम से कम 25 प्रतिशत ऐसी जमा योजनाओं के जरिये की जा रही है। इससे नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकता है क्योंकि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद ज्यादातर आभूषण व्यवसाय संगठित क्षेत्र में तब्दील हुआ है। बैंक सराफों के लिए ऋण देने की प्रक्रिया में सख्ती बरतने लगे हैं, ऐसे में जमाओं पर प्रतिबंध से आभूषण की लागत और बढ़ जाएगी और सराफ ऊंची उधारी को अपनाने को बाध्य होंगे। आभूषण की लागत बढऩे का मतलब है आभूषण महंगे होना।  इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'ऐसा लगता है कि विनियमित जामाओं के प्रतिबंध पर विधेयक न सिर्फ निवेशकों को फर्जी योजनाओं से दूर रखने के लिए बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी लाया गया है कि ऐसी जमाएं बैंकों की कार्यशील पूंजी को मजबूत बनाने के लिए उचित बैंकिंग चैनल के जरिये नियंत्रित हों। इससे सराफ अपनी वित्तीय जरूरत के लिए बैंकों से संपर्क करने के लिए बाध्य होंगे और अधिक जवाबदेह होंगे।'
 
इस स्वर्ण बचत योजना का मुख्य आकर्षण इसका सामान्य डिजाइन है। आभूषण विक्रेता के पास ग्राहक हर महीने एक निर्धारित किस्त जमा कराता है। इसके लिए न्यूनतम रकम 500 रुपये है। 12 महीनों के बाद ग्राहक अपनी इस बचत को समान कीमत के स्वर्ण आभूषण खरीदने के लिए स्वतंत्र होता है या फिर वह योजना को एक साल आगे भी बढ़ा सकता है। 
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