होम » Commodities
«वापस

जूट किसानों के लिए एमएसपी नाकाफी

जयजित दास | भुवनेश्वर May 01, 2018 09:41 PM IST

सरकार ने हाल ही में कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 2,000 रुपये टन की वृद्धि की है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से किसानों को शायद ही कोई लाभ पहुंचे। आर्थिक मामलों की संसदीय समिति (सीसीईए) ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश के आधार पर इस वित्त वर्ष के लिए जूट का एमएसपी 37,000 रुपये प्रति टन निर्धारित किया है। हालांकि संशोधित कीमतें केवल टीडी-5 किस्म पर ही लागू होंगी। जूट की दूसरी किस्मों (टीडी-6 और उससे निचली) की कीमत जूट कमिश्नर कार्यालय से निर्धारित की जाती हैं। जूट के कुल उत्पादन में से 70 प्रतिशत हिस्सेदारी निम्न स्तर के जूट की होती है।

 
उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'किसानों की इस दुर्दशा के पीछे जूट कमिश्नर कार्यालय का ढ़ाई साल पहले (दिसंबर 2015) का निर्णय है, जिसमें खाद्य पदार्थों और चीनी की पैकिंग के लिए हल्के (580 ग्राम) जूट बैग की खरीद का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय ने बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा कर दी और जूट उद्योग को हाशिए पर धकेल दिया। इसका कारण यह था कि हल्के जूट बैग केवल जूट की उच्च किस्म से ही बनाए जा सकते हैं, जो बाजार में बहुत कम मात्रा में उपलब्ध थी।' जूट कमिश्नर कार्यालय के इस निर्णय से देश में बहुतायत में उत्पादित निम्न स्तर के जूट (टीडी-6 और उससे निचली) की मांग में कमी हो गई, जिससे किसानों को अपनी फसल कम कीमत में बेचनी पड़ी। दूसरी ओर, कम मात्रा में उपलब्ध उच्च स्तर के जूट की मांग में अप्रत्याशित तेजी आई। इस निर्णय से टीडी-5 और दूसरी उच्च किस्म की कीमतों तेजी से बढ़ीं और बाजार में मांग-आपूर्ति असंतुलन बढ़ गया। पिछले वर्ष टीडी-6 और उससे निचले स्तर की किस्मों का सरप्लस 27 लाख गांठें (एक गांठ अर्थात 180 किलोग्राम) रहा, जबकि टीडी-5 और उच्च स्तर की कच्चे जूट की किस्मों की पूरी आपूर्ति नहीं हो सकी। 
 
एक जानकार ने बताया, 'एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों की आय पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा। उन्हें फिर से अपने जूट को सस्ते में बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा।' इस बार 7.4 लाख हेक्टेयर पर जूट की खेती हुई। हालांकि वर्ष 2011-12 से लगातार जूट के बुआई रकबे में कमी आ रही है।  कच्चे जूट का एमएसपी निर्धारित करते समय सीएपीसी परिचालन लागत (सी-1 श्रेणी, जैसे बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मशीनें), खेती की जमीन का किराया, एसेट्स पर लिए कर्ज की दरें, मूल्यहृास, उत्पादित फसल से राजस्व, अधिभार और परिवार की स्थिति आदि पर विचार करती है। इसमें वह उत्पादन की कुल लागत (सी-2) को नजरंदाज कर देती है, जिसमें परिवहन लागत, मार्केटिंग और बीमा प्रीमियम भी शामिल हैं। स्रोत द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 2018-19 में किसान लगभग 90 लाख गांठों का उत्पादन करेंगे, जो दिसंबर 2015 के बाद का सबसे अच्छा स्तर होगा। 
 
जूट कीमतों के एमएसपी में हालिया बदलाव पिछले 4 वर्ष में सबसे कम है। वर्ष 2015-16 से कच्चे जूट के एमएसपी में पहले वर्ष 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई और उसके बाद क्रमश: 18.5 तथा 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2015-16 में जूट का एमएसपी 27,000 रुपये प्रति टन था, जो 2016-17 में 32,000 रुपये और 2017-18 में 35,000 रुपये प्रति टन हो गया। 
कीवर्ड agri, farmer, joot, MSP,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक