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बढ़ रहा लौह अयस्क का स्टॉक

जयजित दास | भुवनेश्वर May 01, 2018 09:41 PM IST

निम्न श्रेणी के लौह अयस्क चूर्ण की मांग में कमी और निर्यात में मंदी के रुख की वजह से खदानों के मुहानों पर लौह अयस्क का स्टॉक बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016-17 के आखिर में खदानों के बाहर 14.866 करोड़ टन लौह अयस्क जमा हो चुका था और 2017-18 के आखिर तक यह आंकड़ा 15 करोड़ टन पार जाने का अनुमान है। इस स्टॉक में मुख्य रूप से निम्र श्रेणी का वह चूर्ण है जिसकी घरेलू बजार में कोई मांग नहीं है। उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि ओडिशा और झारखंड में अधिकतर लौह अयस्क चूर्ण जमा हो रहा है क्योंकि प्रचलित निर्यात शुल्क के कारण निचली श्रेणी का चूर्ण (58 से 62 प्रतिशत लौह तत्त्व वाला) निर्यात नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, चीन के इस्पात विनिर्माताओं ने प्रदूषण संबंधी चिंताओं की वजह से उच्च श्रेणी के लौह अयस्क खरीदने में रुचि दिखाई है।

 
खनन क्षेत्र की संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (फिमी) द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि 2016-17 में लौह अयस्क का निर्यात 3.048 करोड़ टन से गिरकर वित्त वर्ष 18 में (जनवरी के आखिर तक) 1.847 करोड़ टन पर आ गया। इसके विपरीत, तुलनात्मक अवधि में लौह अयस्क का आयात 46 लाख टन से बढ़कर 59.5 लाख पर पहुंच गया। 14.866 करोड़ टन के कुल स्टॉक में से ओडिशा की खदानों के मुहानों पर 8.649 करोड़ टन इक_ïा हो चुका है। 4.085 करोड़ टन स्टॉक के साथ दूसरे स्थान पर झारखंड आता है, जबकि अन्य लौह अयस्क उत्पादक - कर्नाटक में 1.044 करोड़ टन का स्टॉक है। खदानों के मुहानों पर जो स्टॉक जमा है, उसमें ओडिशा और झारखंड का सम्मिलित योगदान 85 प्रतिशत है। ये दोनों राज्य गोवा की तुलना में ऊंची श्रेणी (58 प्रतिशत से अधिक लौह तत्त्व) के लौह अयस्क का उत्पादन करते हैं जिसके निर्यात पर 30 प्रतिशत कर लगाया जाता है। फिमी ने केंद्र से बार-बार 62 प्रतिशत तक वाले लौह अयस्क निर्यात के लिए शुल्क खत्म करने की अपील की है।
 
ओडिशा सरकार ने भी केंद्रीय खान मंत्रालय का ध्यान लौह अयस्क के बढ़ते स्टॉक और निर्यात शुल्क हटाने की आवश्यकता की ओर दिलाया था। हालांकि, राज्य ने 10 करोड़ टन से अधिक लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया है, लेकिन घरेलू बाजार में मांग में कमी की वजह से  यह उत्पादन सीमित रहा। अंतरराष्टï्रीय कीमतों में गिरावट के मद्देनजर मौजूदा 30 प्रतिशत शुल्क के साथ ओडिशा से निर्यात किया जाना प्रतिस्पर्धी नहीं था। मांग-आपूर्ति के बीच कमी की स्थिति घरेलू लौह अयस्क के लिए एक अन्य चिंताजनक कारक है। वित्त वर्ष 17 में भारत का लौह अयस्क उत्पादन 19.1 करोड़ टन था, लेकिन इसकी तुलना में घरेलू मांग केवल 10.791 करोड़ टन थी। पिछले साल की तुलना में मुश्किल से 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ इस अवधि के दौरान उत्पादन में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
 
हालांकि, वित्त वर्ष 17 में निर्यात बढ़कर 2.8 करोड़ टन हो गया (जो 2015-16 में 45 लाख टन था), लेकिन यह मुख्य रूप से एनएमडीसी  द्वारा ही किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की इस खनिक का निर्यात एमएमटीसी के जरिये किया जाता है और 10 प्रतिशत रियायती निर्यात शुल्क का लाभ मिलता है।
कीवर्ड iron ore, steel,

  
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