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शीत भंडारण में निवेश बढऩे से खाद्य प्रसंस्करण को मिल रहा है बढ़ावा

दिलीप कुमार झा | मुंबई May 01, 2018 09:42 PM IST

खाद्य उत्पादों को लंबे समय तक संरक्षित रखने और किसानों की आय बढ़ाने के इरादे से सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शीत भंडारण गतिविधियों को बढ़ावा देना शुरू किया है जिसके चलते शीत  भंडारण क्षेत्र में होने वाले निवेश में तीव्र वृद्धि देखने को मिली है।   केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सरकार ने कैलेंडर वर्ष 2017 में 28.27 अरब रुपये मूल्य के 93 शीत भंडारण परियोजना को मंजूरी दी जबकि वर्ष 2016 में महज 57 करोड़ रुपये मूल्य के तीन परियोजना को ही स्वीकृति दी गई थी। वर्ष 2018 के पहले दो महीनों में भी यह सिलसिला जारी रहा। जनवरी-फरवरी 2018 में सरकार 3.29 अरब रुपये मूल्य के 14 परियोजना को मंजूरी दे चुकी है। 
 
शीत भंडारण परियोजना की संख्या और उसमें होने वाले निवेश की राशि में अचानक हुई यह बढ़ोतरी दिखाती है कि सरकार इस क्षेत्र को काफी अहमियत दे रही है। इससे निवेशकों के बढ़ते भरोसे का भी पता चलता है। हालांकि इतनी तेजी पकडऩे के बाद भी शीत भंडारण क्षेत्र का विकास जरूरत के हिसाब से काफी कम हुआ है। फलों के रखरखाव की बेहतर व्यवस्था नहीं होने, पर्याप्त शीत भंडारगृह के अभाव और किसानों को अपने उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की चिंताजनक व्यवस्था होने से बागवानी की करीब 30 फीसदी उपज खराब हो जाती है।
 
इस जरूरत ने ही पिछले कुछ वर्षों में शीत भंडारण क्षेत्र के विस्तार का आधार तैयार किया है। शीत भंडारगृहों के लिए केंद्रीकृत वातानुकूलित प्रणाली मुहैया कराने वाली कंपनी ब्लू स्टार के संयुक्त प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन कहते हैं, 'भारत में शीत भंडारण केंद्र की जरूरत रखरखाव या वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए पड़ती है। डेयरी, औषधि या खानपान उत्पाद शीत भंडारगृहों के बगैर लंबे समय तक नहीं टिक सकते हैं। वैसे स्वतंत्र वाणिज्यिक शीतगृहों की संख्या अब भी कम है क्योंकि उन्हें जगह नहीं भरने की चिंता सताती रहती है।'
 
हालांकि मौजूदा समय में अधिकांश कोल्ड चेन जैव-औषधि, डेयरी, समुद्री उत्पाद, मांस और खानपान उत्पादों तक ही सीमित हैं। ये सारे कोल्ड चेन सीधे प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों और निर्यात-केंद्रित संवर्गों को सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन कृषि उत्पादों का नुकसान कम करने के लिए भारत में कई प्रबंधन कंपनियों ने कोल्ड चेन की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। इस वजह से अगले कुछ वर्षों में शीत भंडारगृह उद्योग में 30 फीसदी से अधिक वृद्धि होने का अनुमान जताया जा रहा है। नैशनल कोलैटरल मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय कौल कहते हैं, 'हम कोल्ड चेन में आक्रामक तरीके से निवेश के बारे में सोच रहे हैं।' 
 
जयपुर स्थित कंपनी स्टार एग्रीवेयरहाउसिंग ऐंड कोलैटरल मैनेजमेंट लिमिटेड के कई राज्यों में शीत भंडारगृह हैं जहां करीब एक लाख टन वजन वाले उत्पादों का भंडारण किया जा सकता है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक अमित अग्रवाल कहते हैं, 'स्टार एग्री के भंडारगृहों में मुख्य तौर पर मसालों का भंडारण किया जाता है। मसाले हमारी कुल क्षमता का 80 फीसदी हिस्सा होते हैं।'  शीत भंडारण में निवेश को सरकार के प्रयासों से भी तेजी मिली है। सरकार ने इस क्षेत्र को ढांचागत क्षेत्र का दर्जा देने के साथ ही भंडारगृहों की स्थापना पर 40 फीसदी सब्सिडी देने का भी ऐलान किया है। क्रिसिल के एक नवीनतम शोध के मुताबिक कोल्ड चेन कारोबार अगले पांच वर्षों में दोगुना हो सकता है। इस रफ्तार की वजह मांस, मछली एवं जैव-औषधि के उत्पाद बनेंगे। लेकिन डेयरी, खाद्य एवं पेय पदार्थों ने भी पिछले वर्षों में निवेश को आकर्षित करने का काम किया है। त्यागराजन कहते हैं, 'कृषि उत्पादों को नियंत्रित माहौल में रखना जरूरी होता है। ऐसा करने पर ही खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।' एक अनुमान के मुताबिक भारत के कुल कृषि उत्पाद का एक फीसदी से भी कम हिस्सा प्रसंस्कृत होता है।
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