होम » Commodities
«वापस

अफवाहों से गिरे हापुस आम के दाम

सुशील मिश्र | मुंबई May 02, 2018 10:03 PM IST

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) की सख्ती और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने आम कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। आम के दाम अचानक गिर गए। कीमतें गिरने के बावजूद स्थानीय बाजार में आम की मांग नहीं बढ़ रही है। कारोबारियों को डर है कि यह अफवाह कहीं उनके विदेशी कारोबार को भी चौपट न कर दे। इसलिए कारोबारी चाहते हैं कि प्रशासन अफवाहों पर नकेल लगाए। नवी मुंबई स्थित थोक फल मंडी वाशी में पिछले सप्ताह एफडीए ने छापेमारी की थी। आम कारोबारियों के गोदामों में छापेमारी के समय कुछ मजदूर आम पैकिंग डिब्बों पर दवा का छिड़काव किया जा रहा था यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया जिसमें दावा किया जा रहा है कि आम की पैंकिंग में दवा छिड़की जा रही है। ऐसे में आम खाने लायक नहीं है और सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद आम की मांग तेजी से गिरी जिसके कारण कीमतें भी गिर गईं। 
 
हापुस आम पर दवा का छिड़काव किए जाने वाला वीडियो वायरल हुआ था। इससे हापुस सहित लगभग सभी आमों की खरीदारी पर बुरा असर पड़ा है। बेहतर आवक और कमजोर मांग की वजह से थोक बाजार में आम का भंडारण बढऩे लगा है। इस कारण भी इसके दाम में गिरावट आई है। एक सप्ताह पहले वाशी थोक बाजार में हापुस एक नंबर आम की कीमत 600 से 1,500 रुपये दर्जन थी जो गिरकर 200-600 रुपये प्रति दर्जन हो गई है। वहीं हापुस दो नंबर आम की कीमत 300 से 600 रुपये प्रति दर्जन से गिरकर 200 से 400 रुपये दर्जन हो गई है। 
 
वाशी थोक बाजार के आम कारोबारियों का कहना है कि इस समय वाशी में प्रति दिन करीब एक लाख पेटी (एक पेटी में चार दर्जन) आम की आवक है। आवक लगातार बढ़ रही है जबकि बिक्री कमजोर हो रही है। आम के सडऩे के डर से कम कीमत पर माल बेचना पड़ रहा है। बाजार में आम सड़ रहे हैं जिससे नुकसान हो रहा है। कारोबारियों का दावा है कि सोशल मीडिया में जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें जो दवा दिखाई जा रही है वह एथेनॉल दवा है। एथेनॉल पर कोई प्रतिबंध नहीं है। कुछ साल पहले कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल होता था लेकिन अब वह प्रतिबंधित है और उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। 
 
इस पूरे मामले में एफडीए के अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान जो नमूने लिए गए थे उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही मामले का खुलासा होगा। दूसरी तरफ कारोबारियों का कहना है कि नकारात्मक प्रचार के कारण लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस समय हर दिन विदेशी खरीदार बाजार में माल देखने आ रहे हैं। अफवाह के कारण उनके भी मन में डर बैठ न जाए। इसलिए एफडीए मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे।
 
विदेशों में जो माल भेजा जाता है उसकी गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाता है। एपीएमसी के अधिकारियों के मुताबिक एपीएमसी के निर्यात भवन में आम को बैक्टीरिया मुक्त बनाने का आधुनिक प्लांट लगाया गया है। वेपर हीट ट्रीपमेंट, रेडिएशन प्रक्रिया के बाद ही आम विदेश भेजे जाते हैं। वर्ष 2014-15 में 42,998 टन आम का निर्यात किया गया था जिससे 303 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। लेकिन वर्ष 2015-16 में आम का निर्यात घटकर 36,253 टन हो गया। हालांकि आम की जबरदस्त मांग के कारण आय बढ़ी तथा 320 करोड़ रुपये का आम निर्यात किया गया था। 
कीवर्ड mango, price, FDA,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक