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ड्रैगन लील रहा भारत का स्वर्ण बाजार

राजेश भयानी | मुंबई May 03, 2018 10:00 PM IST

भारत स्वर्ण बाजार में तेजी से अपना हिस्सा चीन के हाथों गंवा रहा है। इस परिदृश्य में 2018 की जनवरी-मार्च की अवधि इस पीली धातु की वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी के लिहाज से सबसे खराब रही। मार्च तिमाही में स्वर्ण मांग का रुझान बताने वाली गुरुवार को जारी विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में कुल वैश्विक उपभोक्ता स्वर्ण मांग (आभूषण और निवेश) 3,198.6 टन रही, जो 2010 की तुलना में दो प्रतिशत कम है। 2010 की मांग में भारत का हिस्सा 1,001.7 टन रहा, जो कुल मांग का 31 प्रतिशत था, जबकि इसमें चीन की हिस्सेदारी 29.7 प्रतिशत थी। 2017 में जहां कुल मांग में चीन का हिस्सा बढ़कर 31.6 प्रतिशत हो गया, वहीं भारत का हिस्सा गिरकर 23 प्रतिशत पर आ गया। पारंपरिक रूप से चीन और भारत वैश्विक तौर पर सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता रहे हैं।
 
मार्च तिमाही में वैश्विक स्वर्ण मांग में भारत का हिस्सा और गिरकर 15.5 प्रतिशत पर गया, जबकि चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई। पिछले 5-6 सालों के दौरान भारत जिन संरचनात्मक परिवर्तनों से होकर गुजरा है, उन्हें इस बदलते रुझान का जिम्मेदार माना जा सकता है। हालांकि तुलनात्मक रूप में चीन ने भी सुधारों को लागू किया है, लेकिन इसने ऐसा बाजार को बिगाड़े बिना किया है। चीन में स्वर्ण व्यापार पूरी तरह से ऑनलाइन स्पॉट एक्सचेंजों की ओर स्थानांतरित हो चुका है और आयात भी एक्सचेंज पर दर्ज किया जाता है। दूसरी तरफ, भारत ने पहले स्वर्ण आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाए और बाद में ऊंचे मूल्य वाली मुद्रा का विमुद्रीकरण कर दिया तथा सराफा में कालेधन के खतरे को कम करने के लिए कठोर नियमों को लागू कर दिया।
 
रही-सही कसर वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने के दौर ने पूरी कर दी। डब्ल्यूजीसी का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद बड़े, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय शृंखला वाली दुकानों ने छोटे, एकल और मध्य खुदरा विक्रेताओं की तुलना में बेहतर बिक्री दर्ज की है। बाजार का यह भाग काफी तेजी और आसानी से जीएसटी के अनुरूप ढल गया। लेकिन व्यापक आभूषण उद्योग जीएसटी के इस नए दौर के अनुरूप अभी ढल ही रहा है। बाजार अनुसंधान बताते हैं कि जीएसटी का अनुपालन अपेक्षाकृत अधिक है। इस तरह, भारत की कुल मांग को धक्का पहुंचा और यह गिरकर आठ तिमाही के निचले स्तर 115.6 टन पर आ गई, जो मार्च 2017 की तिमाही से 12 प्रतिशत कम है। आभूषणों की मांग भी सालाना आधार पर 12 प्रतिशत गिर गई। 
 
डब्ल्यूजीसी इंडिया के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि विकसित हो रहे समष्टिगत आर्थिक संकेतकों से आभूषण की मांग में सुधार का परिदृश्य दिखता है। इसके अलावा, केंद्रीय बजट में ग्रामीण आय को बढ़ावा देने की उपायों की घोषणा की गई है, जिसमें ऊंचा न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि ऋण में इजाफा शामिल है। यह महत्त्वपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र की मांग के लिए अच्छा शकुन है, जैसा कि इस साल सामान्य मॉनसून का भी पूर्वानुमान है।
 
ग्रामीण खरीद से आएगा सोने की मांग में निखार
 
विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने गुरुवार को कहा कि दिसंबर तक भारतीय स्वर्ण मांग में सुधार हो सकता है। अच्छी मॉनसूनी बारिश और किसानों की आय बढ़ाने के सरकारी प्रयासों की वजह से ग्रामीण खरीद में तेजी आ सकती है जिससे रुपये में कमजोरी के कारण ऊंची कीमतों का असर खत्म हो सकता है। डब्ल्यूजीसी के भारतीय संचालन के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने रॉयटर्स से कहा कि खाद्यान्न के लिए रियायती कीमतों में इजाफे के द्वारा सरकार के ग्रामीण आय में वृद्धि के उपायों और 2018 में सामान्य मॉनसूनी बारिश के पूर्वानुमान से मांग में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल से दिसंबर की कुल मांग पिछले साल की तीन तिमाहियों की तुलना में अधिक रहेगी। भारत की दो-तिहाई स्वर्ण मांग ग्रामीण क्षेत्र से आती है, जहां धन को परंपरागत रूप से आभूषण में लगाया जाता है। 
 
डब्ल्यूजीसी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि मार्च में समाप्त होने वाली इस तिमाही में भारतीय स्वर्ण मांग पिछले साल से 12 प्रतिशत गिरकर 115.6 टन पर आ गई है। स्थानीय कीमतों में उछाल के बाद आभूषण मांग लुढ़ककर पिछले 10 सालों के दूसरे निम्नतम स्तर पर आने के कारण ऐसा हुआ। सोमसुंदरम ने कहा कि मार्च तिमाही में शादी-विवाह के लिए शुभ समझे जाने वाले दिनों में कमी के करण भी मांग में गिरावट आई। 2018 में भारत का स्वर्ण उपभोग 700-800 टन के बीच रहने की संभावना है।
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