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दार्जिलिंग चाय के लिए दीवानगी में आई कमी!

अभिषेक रक्षित | कोलकाता May 04, 2018 09:57 PM IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दार्जिलिंग चाय के दाम एक समय 10 फीसदी से अधिक बढ़ गए थे लेकिन हाल के दिनों में इसकी कीमतें 10-15 फीसदी तक नीचे आ चुकी हैं। मौसम की पहली तुड़ाई वाली दार्जिलिंग चाय पत्तियों की औसत कीमत करीब 45 डॉलर तक जा पहुंची थीं लेकिन मध्य अप्रैल के बाद इसके भाव 10-15 फीसदी तक गिर गए हैं। दार्जिलिंग चाय उत्पादक संघ (डीटीए) के महासचिव कौशिक बसु ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में इस किस्म की चाय की कीमतों में गिरावट की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि निजी बिक्री में दार्जिलिंग चाय की कीमतें 10-15 फीसदी तक नीचे आ चुकी हैं। गौरतलब है कि कुल बिक्री में निजी बिक्री का अनुपात 80 फीसदी से भी अधिक है।

 
गुडरिक ग्रुप के विनोद गुरुंग के मुताबिक निजी बिक्री में दार्जिलिंग चाय के दाम गिरने की वजह यह है कि लोग पहली खेप वाली चाय का इंतजार करते हैं। चाय उद्योग के सूत्र बताते हैं कि मार्च की शुरुआत में चाय की औसत कीमत 3,000-3,500 रुपये प्रति किलो के दायरे में चल रही थीं लेकिन अप्रैल की शुरुआत में यह 1,500-2,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर आ गया। हालांकि अप्रैल के अंत तक इसके भाव और गिरते हुए 900-1,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गए। कुछ निर्यातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय चाय पैकेट निर्माताओं और चाय ब्लेंडरों की थोक खरीदारी में सुस्ती आने से दार्जिलिंग चाय के भाव गिरे हैं। एक चाय बागान के मालिक कहते हैं, 'शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय चाय विक्रेताओं और बुटीक खरीदारों ने मौसम की पहली तुड़ाई वाली दार्जिलिंग चाय की अच्छी खरीद की थी और उसी वजह से दाम चढ़े भी थे। लेकिन बुटीकों में चाय की बिक्री घटने से इसकी औसत कीमतें भी गिर गई थीं।'
 
दार्जिलिंग चाय की निर्यातक फर्म सुबोध ब्रदर्स के निदेशक सुगात दत्त कहते हैं, 'हालांकि थोक खरीदार और यूरोप एवं जापान के चाय ब्लेंडर नई खेप आने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उनकी नजर कीमतों पर भी टिकी हुई है। ऐसा लगता है कि वे चाय के 20-25 डॉलर प्रति किलो के भाव पर आने का इंतजार कर रहे हैं।' भले ही दार्जिलिंग चाय उद्योग ने मौसम की नई खेप को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से अच्छी प्रतिक्रिया आने की उम्मीदें लगाई हुई थीं लेकिन वास्तव में ऐसा हुआ नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत सुस्त रही है। 
 
गुरुंग कहते हैं कि पिछले साल की पहली खेप वाली चाय की तुलना में इस साल की पहली खेप के लिए मांग थोड़ा अधिक रह सकती है लेकिन बसु का मानना है कि पिछले साल हुई बिक्री और पूछपरख के आधार पर ही बिक्री तय होगी। दार्जिलिंग की पहाडिय़ों पर मौजूद मीम बागान का स्वामित्व रखने वाले चाय उत्पादक एंड्रयू यूल ने अप्रैल के महीने में प्रीमियम श्रेणी की पांच किलो चाय 15,750 रुपये प्रति किलो के भाव से ऑनलाइन चाय विक्रेता स्टार्टअप टीबॉक्स को बेची थी। इसी तरह नामरिंग टी एस्टेट में उपजी उम्दा चाय की एक छोटी खेप मार्च में 12,500 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी थी।
 
इसके बावजूद पिछले साल प्रीमियम चाय के भाव काफी अधिक रहे थे। मकाईबाड़ी टी एस्टेट के कुर्सियांग बागान में पैदा हुई लग्जरी चाय का निजी बिक्री में 19,365 रुपये प्रति किलो का भाव लगा था। इसी तरह गुडरिक ग्रुप के बादामताम बागान की पैदावार लग्जरी चाय 12,900 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी थी।  पिछले साल गोरखालैंड राज्य के लिए साढ़े तीन महीनों तक चले प्रदर्शनों के चलते दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 70 फीसदी तक गिर गया था और चाय उद्योग को करीब 3.5 अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
 
अपनी खास महक एवं उम्दा स्वाद के लिए दुनिया भर में मशहूर दार्जिलिंग चाय के उत्पादकों को डर है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से दूर रहने के चलते थोक खरीदार कहीं अन्य चाय किस्मों का रुख न कर लें। नेपाल, सीलोन और ताइवान चाय स्वाद एवं महक में काफी हद तक दार्जिलिंग चाय के करीब होती हैं। दत्त इस आशंका को सही बताते हुए कहते हैं कि कई थोक खरीदारों ने पिछले महीनों में श्रीलंका और ताइवान से चाय की खरीद की है और कुछ खरीदार दार्जिलिंग चाय खरीदने के लिए अपने पास रखे पुराने भंडार के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
 
बहरहाल गुरुंग बेहतर हालात आने की उम्मीद कर रहे हैं। वह कहते हैं, 'हमें थोक खरीदारी शुरू होने के लिए जून तक इंतजार करना होगा। उसके बाद खरीद की मात्रा और भाव दोनों पर इसका असर देखने को मिलेगा।' डीटीए के पूर्व चेयरमैन एस एस बगाडिय़ा कहते हैं कि दूसरी तुड़ाई वाली चाय के बाजार में आने के साथ ही कीमतों में तेजी आने की संभावना कम ही है क्योंकि थोक खरीदार एक खास स्तर से अधिक भाव नहीं देंगे।
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