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बढिय़ा उत्पादन से लुढ़के दाम टमाटर किसान हुए परेशान

वीरेंद्र सिंह रावत और टीई नरसिम्हन | लखनऊ /चेन्नई May 06, 2018 09:59 PM IST

भारतीय कृषि क्षेत्र का संकट तिलहन, दलहन और कपास से अब बागवानी फसलों में फैल गया है। कुछ हफ्ते पहले आलू किसान परेशान थे और अब टमाटर किसानों को बड़ा धक्का लगा है। भारत में पिछले तीन सालों के दौरान टमाटर के जोरदार उत्पादन के साथ ही चालू वर्ष 2017-18 में उत्पादन 2.23 करोड़ टन पर पहुंच गया, जो 2014-16 की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है। इसके परिणाम स्वरूप राज्यों में कीमतों में गिरावट आई है। टमाटर किसानों को बढिय़ा प्रतिफल दिलाने वाले लाभकारी मूल्य ने उन्हें इस मौसम में बड़े पैमाने पर इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया था। इससे टमाटर की आवक बढ़ी और कीमतों में गिरावट आई।

 
आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश और कर्नाटक शीर्ष उत्पादक हैं। हालांकि कीमतों में गिरावट हर जगह आई है, लेकिन इस सीजन में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्यों में भी किसानों की चिंता सड़कों पर नजर आ चुकी है। साल दर साल जोरदार फसल के अलावा खाद्य प्रसंस्करण क्षमता में कमी ने भी अपनी भूमिका निभाई है। बागवानी फसल किसानों को समृद्ध करने में सफल नहीं हो सकी हैं। इससे पहले आलू किसान आंदोलन पर थे और प्याज भी ऐसी अन्य फसल है जिसके संबंध में ऐसा संकट आम बात है। कमाई उत्पादन लागत से काफी कम होने की वजह से उत्तर में हरियाणा के किसानों से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के किसानों तक को टमाटर की फसल खेतों में सूखने के लिए छोडऩे या फिर आस-पास फेंकने के लिए के लिए मजबूर होना पड़ा। फसल को बिना तुड़ाई छोड़ दिया गया, क्योंकि तुड़ाई और स्थानीय मंडियों तक परिवहन से लागत में वृद्धि हो जाती।
 
किसानों के हित में कार्यरत संस्था किसान जागृति मंच के अध्यक्ष प्रो. सुधीर पंवार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सर्दियों में आलू की कीमतों में गिरावट के बाद गर्मियों में टमाटर को उसी दुर्भाग्य का सामना करना पड़ रहा है। थोक में टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दाम प्रति किलोग्राम एक रुपये से भी कम के नए निचले स्तर को छू चुके हैं। इसी तरह की स्थिति कुछ अन्य सब्जियों और फलों के साथ भी है। उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में आलू किसानों ने हाल ही में गिरती कीमतों का विरोध करने के लिए सड़कों पर अपनी फसल को फेंक दिया था, जबकि कोल्ड स्टोर मालिकों ने भी मुकदमा किया था क्योंकि किसान अपना स्टॉक वापस लेने में नाकाम रहे थे ताकि उन्हें किराये का बोझ वहन न करना पड़े।
 
तमिलनाडु में फल और सब्जियों के सबसे बड़े थोक बाजार कोयम्बेडु में टमाटर की औसत कीमत 10 रुपये प्रति किलोग्राम थी। कीमतों में अभी सुधार आया है। दो महीने पहले दाम गिरकर दो रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंंच गए थे। जिससे तिरुपुर, कृष्णागिरि और सालेम जैसे जिलों में किसानों को मजबूरन खुली जगहों में टमाटर फेंकने पड़ रहे थे।
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