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अंडे-चिकन के दामों में आई तेजी

दिलीप कुमार झा | मुंबई May 06, 2018 09:59 PM IST

अंडे और चिकन के दामों में पिछले 3-4 हफ्तों में तेजी आई है। ऐसा प्रमुख रूप से झुलसाने वाली गर्मी में खराब रख-रखाव वाले फार्मों में कई पक्षियों के मरने के बाद आपूर्ति में कमी आने से हुआ है। गुजरात में फिलहाल चिकन के दाम 81 रुपये प्रति किलोग्राम हैं। मार्च की शुरुआत में दाम 72 रुपये प्रति किलोग्राम थे, जो 11 अप्रैल को लुढ़ककर 61 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। मुंबई में मार्च के आखिर में इसके दाम गिरकर 49 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए थे, जबकि महीने के शुरू में दाम 59 रुपये प्रति किलो थे। अब ये दाम 82 रुपये हैं। देश भर में अन्यत्र भी दामों में यही रुख दिख रहा है। अंडे के दामों में भी तेजी आई है।
 
देश के बड़े पोल्ट्री फार्मों में शुमार गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक बलराम यादव ने कहा कि आमतौर पर अंडों औ्र चिकन की मांग मार्च में परीक्षाओं (स्कूलों की) के शीर्ष सीजन के दौरान गिर जाती है जिसके परिणाम स्वरूप दामों में गिरावट आती है। अप्रैल के पहले-दूसरे हफ्ते तक मांग धीरे-धीरे तब फिर से बढऩे लगती है, जब परीक्षाओं का सीजन खत्म होने लगता है। चिलचिलाती गर्मी शुरू होने के साथ ही चिकन की मृत्यु-दर भी बढऩे लगती है, जिससे इसकी आपूर्ति में तीव्र कमी आती है। इन सभी कारणों ने मिलकर अचानक पोल्ट्री उत्पादों के दामों में इजाफा कर दिया।
 
चारे के दाम अभी भी कम होने से मुर्गी किसान इस सीजन में अपने मार्जिन में तेज इजाफे की आस लगाए हुए हैं। 20 अप्रैल तक निर्यात गुणवत्ता वाले सोयाबीन आहार (सत) के दाम मामली रूप से 3.9 प्रतिशत बढ़कर 33,550 रुपये प्रति टन हो गए। इस अवधि में, सोयाबीन के दाम 4.1 प्रतिशत बढ़कर 38,000 प्रति टन हो गए। थोक बाजार बेंचमार्क गुलाब बाग (बिहार) में मक्का के दाम 1 मार्च से मात्र एक प्रतिशत बढ़कर 12,040 रुपये हो गए, हालांकि 14 अप्रैल को दाम 13,400 रुपये के शीर्ष पर थे।
 
वेंकटेश्वर हैचरीज के महाप्रबंधक केजी आनंद ने कहा कि आम उपभोक्ता मांग से इतर हिंदुओं और मुस्लिमों के चल रहे शादी-विवाह केसीजन के दौरान देश भर में पोल्ट्री उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। आम तौर पर उद्योग का शीर्ष सीजन 10 अप्रैल से 1 जून के बीच रहता है। इसलिए इस सीजन के दौरान पॉल्ट्री के दाम आगे और बढऩे का अनुमान है।  अप्रैल और मई में लू की शुरुआत से चिकन की मृत्यु दर तेजी से बढ़कर 8-9 प्रतिशत हो जाती है। इस दौरान फार्मों में पानी की भी कमी रहती है, जबकि नवंबर और दिसंबर के ठंडे सीजन में मृत्यु दर पांच प्रतिशत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 2-3 हफ्तों में दामों में 25-30 प्रतिशत का इजाफा संभव है।
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