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जीएसटी से बढ़ा आभूषण में नकद कारोबार

राजेश भयानी | मुंबई May 09, 2018 10:06 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद देश में सोने के कारोबार का तरीका बदल गया है। यह बड़ी कंपनियों की वृद्धि में मददगार रहा है और उद्योग का एकीकरण हो रहा है। वहीं छोटे सराफ अपने ग्राहक और कारोबार बचाने के लिए अन्य कई तरीके अपना रहे हैं। इस उद्योग के लिए चुनौतियां अभी बरकरार हैं क्योंकि ऊंची कीमतों से मांग प्रभावित होगी। सराफों का वित्तीय स्थिति पर दबाव है और लागत बढ़ रही है। सोने के कारोबार पर जीएसटी का तात्कालिक असर इस धातु की तस्करी में बढ़ोतरी के रूप में दिखा है। जीएफएमएस (थॉमसन रॉयटर्स की धातु शोध इकाई) के स्वर्ण सर्वेक्षण में कहा गया है, 'हमारा अनुमान है कि पिछले साल देश में 134.5 टन की तस्करी हुई, जो 2016 से 10 टन अधिक है।Ó
 
आमतौर पर जीएसटी से नकद लेनदेन में गिरावट आती है। मगर देश में नकद लेनदेन में बढ़ोतरी चौंकाने वाली है क्योंकि कारोबार में धीरे-धीरे डिजिटल और कार्ड भुगतान को अपनाया जा रहा है। आधिकारिक आयात 880 टन रहा है। हालांकि इसमें से निर्यात को घटा देते हैं तो पिछले साल शुद्ध आधिकारिक आयात 663 टन रहा।  सरकार ने पिछले साल आभूषण उद्योग के लिए कई नियमों की घोषणा की थी। दो लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन पर रोक से सराफों ने कम वजन के आभूषण बेचने शुरू कर दिए हैं। इन गहनों के भारी दिखने के लिए इनमें रत्न जड़े जा रहे हैं। 
 
बाद में ग्राहकों और सराफों ने एक तरीका निकाल लिया। जीएफएमएस सर्वेक्षण के मुताबिक ग्राहक पूरी राशि का नकद भुगतान करते हैं और 0.7 से 1 फीसदी तक छूट प्राप्त करने के लिए सोने की कीमतों को लेकर मोलभाव करते हैं। कारोबारी इस लेनदेन को पुराने के बदले नए गहनों की खरीद के रूप में दिखा देते हैं। सराफ मेकिंज चार्ज का बिल देंगे और जॉब वर्क पर जीएसटी का भुगतान करते हैं। ग्राहक से प्राप्त नकदी का इस्तेमाल अनाधिकारिक बाजार से सोना खरीदने में किया जाता है। अनाधिकारिक सोने को पिघलाया जाएगा और इसे ग्राहकों से प्राप्त पुराने गहनों को पिघलाने के रूप में दिखा दिया जाता है। एक अन्य असर यह हुआ है कि जीएसटी का असर सामान्य हो जाने के बाद बड़ी खुदरा शृंखलाएं बाजार की ज्यादातर हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब 25 खुदरा कारोबार बड़ी खुदरा शृंखलाओं के पास आ गया है। 
 
मालाबार गोल्ड ऐंड डायमंड्स के चेयरमैन अहमद एमपी ने कहा, 'राष्ट्रीय और खुदरा शृंखलाएं बेहतर बिक्री में सफल रही हैं, जिन्हें अच्छी ग्राहक सेवाओं के अलावा प्रभावी विपणन रणनीति, सूझबूझ से खरीद और स्टॉक प्रबंधन से मदद मिली है।Ó बड़ी शृंखलाओं को 3.5 फीसदी ब्याज दर पर गोल्ड मेटल लोन जैसी बैंकिंग सुविधाएं मिली हुई हैं। ये सुविधाएं छोटे सराफों के पास नहीं हैं। बड़ी खुदरा शृंखलाओं की बाजार हिस्सेदारी बढऩे से उद्योग में एकीकरण भी हो रहा है। बहुत से छोटे सराफों ने नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली का पालन शुरू कर दिया है। विश्व स्वर्ण परिषद के मुंबई स्थित कार्यालय ने कहा है कि अब 75 फीसदी उद्योग जीएसटी को अपना रहा है। डब्ल्यूजीसी के इंडिया हेड सोमसुंदरम पीआर इसे एकीकरण नहीं कहते हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार प्रतिस्पर्धी बनेगा और व्यक्तिगत उद्यमियों का प्रवेश ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। 
 
जीएफएमएस का कहना है कि छोटे सराफों को कर के लिहाज से फायदा मिल रहा है। वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में सालाना कारोबार के आधार पर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों की परिभाषा बदलने का प्रस्ताव रखा गया है और कर की दर 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी की गई है। इससे 2.5 अरब रुपये तक के सालाना कारोबार वाले सराफों को काफी फायदा हुआ है। उद्योग के लिए एक चुनौती अवैध जमाओं पर रोक लगाने वाला प्रस्तावित कानून है। यह कानून सराफों के स्वर्ण जमा योजनाएं चलाने पर रोक लगाता है। सराफ इसे अग्रिम बिक्री के रूप में दिखाते हैं, लेकिन यह रकम 11 महीने तक जमा की जाती है। यह प्रस्ताव कानून बनने पर उद्योग पर असर पड़ेगा। 
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