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महाराष्ट्र में अरहर खरीद 15 तक

सुशील मिश्र | मुंबई May 09, 2018 10:06 PM IST

मंडियों में अरहर के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे होने के कारण किसानों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। सरकारी खरीद केंद्रों में खरीदारी नहीं होने से किसान परेशान हो रहे हैं। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अरहर (तुअर) की खरीद की समयावधि बढ़ा दी है। अब सरकारी केंद्रों में 15 मई तक तुअर की खरीद की जा सकेगी।  इस साल रिकॉर्ड उत्पादन होने और पिछले साल का स्टॉक जमा होने से अरहर किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। राज्य की मंडियों में अरहर का औसत भाव 4,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि केंद्र सरकार ने अरहर का एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया है। सरकार द्वारा तय किए गए भाव पर खरीदारी नहीं होने से किसानों को प्रति क्विंटल 1,400 से 1,500 रुपये का नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि खरीदारी केंद्रों पर उनका माल नहीं खरीदा जा रहा है और मंडियों में भाव बहुत कम है। सरकार एक तरफ पैदावार बढ़ाने के लिए कहती है तो दूसरी तरफ किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान संगठनों के मुताबिक इस वर्ष राज्य में अरहर का उत्पादन 115 लाख क्विंटल होने का अनुमान है। राज्य सरकार ने इस साल 44.6 लाख क्विंटल अरहर एमएसपी पर खरीदे जाने का लक्ष्य तय किया था। 
 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 7 मई तक करीब 28.89 लाख क्विंटल तुअर की खरीद की गई है। राज्य के विपणन मंत्री सुभाष देशमुख के मुताबिक राज्य में 1 फरवरी से तुअर की खरीद की शुरुआत हुई थी। राज्य में 7 मई तक 192 तुअर खरीद केंद्रों पर 2 लाख 30 हजार 348 किसानों से 28 लाख 88 हजार 918 क्विंटल तुअर खरीदी गई है। किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए तुअर की खरीद की समयावधि बढ़ाई गई है। अब 15 मई तक तुअर की खरीद की जा सकेगी।  देशमुख ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत खरीद केंद्रों के अलावा कुछ और केंद्रों की शुरुआत किसानों की मांग एवं जिलाधिकारियों की सिफारिश के अनुसार की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल महाराष्ट्र में तुअर की खरीद में घोटाला हुआ था। 
 
इस साल राज्य में तुअर की  रिकॉर्ड पैदावार हुई है। साथ ही पिछले साल का भी स्टॉक जमा है जिसके कारण मंडियों में खरीदार नदारत हैं। गौरतलब है कि पिछले साल सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की तुअर की खरीद की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार द्वारा खरीदी गई तुअर में से 95 फीसदी तुअर का प्रसंस्करण नहीं हो पाया जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ है। विपणन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तुअर का राज्य में भरपूर स्टॉक है। पिछले साल जो खरीदी की गई थी उसका अभी तक प्रसंस्करण नहीं हो सका है। ऐसे में नई फसल की जो खरीद की जा रही है उसके स्टॉक की समस्या के साथ पुराने माल को निकालने की भी चुनौती है। समय पर प्रसंस्करण न होने से तुअर के खराब होने की भी आशंका है जिसके कारण तुअर की खरीद में सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। 
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