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रिजर्व बैंक ने खरीदा 3.1 टन सोना

राजेश भयानी | मुंबई May 10, 2018 11:18 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस साल मार्च में समाप्त होने वाली तिमाही में 3.1 टन सोना खरीदा है। केंद्रीय बैंक ने दो खेपों में यह खरीदारी की और यह उसके विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा है। वर्ष 2009 के बाद यह पहला मौका है, जब आरबीआई ने सोना खरीदा है। तब उसने अंतरराष्टï्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 200 टन सोना 1032 डॉलर प्रति टन के हिसाब से खरीदा था। आईएमएफ के मार्च 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 560.3 टन सोना शामिल है। आरबीआई ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया लेकिन सूत्रों के मुताबिक सोने की यह खरीद प्रयोग की तरह लगती है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार में मामूली बढ़ोतरी हुई है। सोने की खरीद बहुत ज्यादा नहीं है और इसका कोई रणनीतिक महत्त्व नहीं है, बशर्ते कि इसमें आगे तेजी न आए। 

एक सूत्र ने कहा कि सरकार ने बजट पेश करने से पहले विदेशी मुद्रा भंडार में सोना जोडऩे का फैसला किया था। लेकिन संवेदनशील होने के कारण इस बारे में घोषणा नहीं की गई थी। हालांकि सूत्र ने कहा कि वह इस बात को लेकर निश्चित तौर पर नहीं बता सकता कि इस फैसले में आरबीआई भी शामिल था या नहीं। दुनियाभर में केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर के जोखिम से बचने के लिए अपने मुद्रा भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर अब तक की सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है। अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना जोडऩे वाले देशों में रूस और तुर्की प्रमुख हैं। तुर्की के केंद्रीय बैंक ने मई 2017 में एक नीति घोषित की थी जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की जगह सोने को प्राथमिकता देने का संकेत दिया गया था। 

तुर्की के वाणिज्यिक बैंकों के पास भी भारी मात्रा में सोना है, जो उन्होंने रिजर्व ऑप्शन मैकेनिज्म (आरओएम) के तहत केंद्रीय बैंक में रखा हुआ है। उल्लेखनीय है कि तुर्की ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना का सफल उदाहरण पेश किया है और इसमें वाणिज्यिक बैंकों में जमा सोना शामिल है। तुर्की के विदेशी मुद्रा भंडार में 595.5 टन सोना है। विदेशी मुद्रा भंडार में सर्वाधिक सोना रखने के मामले में उसका दुनिया में 11वां स्थान है। डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए रूस पिछले तीन वर्षों से हर साल 200 टन सोना खरीदकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल कर रहा है और अब उसका स्वर्ण भंडार चीन से बड़ा हो गया है। स्वर्ण भंडार के मामले में रूस का दुनिया में छठा स्थान है। रूस और चीन अपना अधिकांश सोना स्थानीय स्तर पर खरीदते हैं क्योंकि उनके पास सोने की कई अहम खदानें हैं। सूत्रों ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के तहत जमा हुए सोने को विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। एक सूत्र ने कहा कि आरबीआई ने मार्च में लंदन के दो बैंकों से सोने की खरीदारी की थी। 

पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी स्वर्ण बाजार के लिए बड़ी घटना है क्योंकि वे हर साल औसतन 350 से 400 टन सोने की खरीद कर रहे हैं। चीन स्थानीय स्तर पर सोना खरीदता है लेकिन इसकी घोषणा एक अंतराल के बाद करता है। अलबत्ता जीएफएमएस थॉमसन रायटर्स के मुताबिक चीन दो साल के अंतराल के बाद अपने विदेशी मुद्रा भंडार में जोडऩे के लिए सोने की खरीदारी शुरू करेगा। 

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